नवादा : जिले के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एमडीएम के लिए चावल आपूर्ति में भयंकर हेराफेरी की जा रही है। उसना चावल के बजाय गोदाम प्रबंधक व डोर स्टेप डिलीवरी के अभिकर्ता की मिलीभगत से अरवा चावल की आपूर्ति की जा रही है। ऐसा किये जाने से बच्चों के सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
बताया जाता है कि एमडीएम निदेशक का स्पष्ट आदेश है कि विद्यालयों में बनने वाले एमडीएम के लिए उसना चावल की आपूर्ति करना है। लेकिन गोदाम प्रबंधक व डोर स्टेप डिलीवरी आपूर्ति कर्ता की मिलीभगत से उसना चावल की आपूर्ति की जा रही है। और तो और शायद ही कोई ऐसा बोरा हो जिसमें 50 किलोग्राम चावल हो। यानी प्रति बोला 10 से 15 किलोग्राम चावल कम उपलब्ध कराना ये अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं।
जानकारों का मानना है कि बाजार में अरवा चावल 16 से 18 रुपए प्रति किलो आसानी से उपलब्ध है जबकि उसना चावल 32 से 34 रुपए प्रति किलो तक मिल रहा है। ऐसे में उसना चावल का उठाव व बिक्री कर उसके एवज में अरवा चावल की आपूर्ति कर शेष राशि का बंदरबांट किया जा रहा है। कमोवेश इसी प्रकार की कहानी आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए टेक होम राशन के मामले में किया जा रहा है।
बावजूद जिला प्रशासन का इस प्रकार के चल रहे खेल की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसा होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जिले के बुद्धिजीवियों ने उपरोक्त मामले की जांच करा दोषी के विरुद्ध कार्रवाई व राशि वसूली की मांग समाहर्ता से की है।
भईया जी की रिपोर्ट