बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में बिहार की सियासत एक नए दौर में प्रवेश कर सकती है। सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने आगामी 10 अप्रैल को दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इस प्रस्तावित बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें न केवल बिहार बीजेपी के शीर्ष नेता शामिल होंगे, बल्कि बिहार में पार्टी का शीर्ष चेहरा भी तय हो जाएगा। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन और नए मुख्यमंत्री के चयन पर सहमति बनाना बताया जा रहा है। यह भी चर्चा है कि खुद नीतीश कुमार 10 अप्रैल को दिल्ली में रहेंगे, जहां वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद उनके भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की संभावना है। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन जिस तरह से बैठकों और बयानों का दौर जारी है, उससे यह साफ है कि बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव होने वाला है।
दिल्ली में होगी कोर ग्रुप की अहम बैठक
10 अप्रैल को होने वाली यह बैठक बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की निगरानी में आयोजित की जाएगी। इसमें बिहार बीजेपी कोर ग्रुप के प्रमुख नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय स्तर के नेता भी शामिल होंगे। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे, जो मुख्यमंत्री पद के लिए नाम पर चर्चा करेंगे। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा मौजूद रहेंगे। इनके अलावा नित्यानंद राय, संजय जायसवाल, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र जी और प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया, बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल और मंगल पांडेय समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
कौन बनेगा बिहार का नया मुख्यमंत्री?
नए फॉर्मूले के तहत भारतीय जनता पार्टी (BJP) बिहार में पहले से ज्यादा मजबूत भूमिका में नजर आ सकती है। सूत्रों के अनुसार बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए पार्टी के कई कद्दावर नेताओं के नामों पर मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो सभी गुटों को साथ लेकर चल सके और बिहार में संगठन को मजबूत बनाए। बैठक में आम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी, जिसके बाद अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार में जातीय समीकरणों और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए किसी चौंकाने वाले नाम पर मुहर लग सकती है। इधर चर्चा है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल को दिल्ली में राज्यसभा की शपथ लेने के बाद पटना लौट सकते हैं। इसके बाद 12 या 13 अप्रैल को उनके इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है।