नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में अपने नेतृत्व ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता और सांसद राघव चड्ढा को उपनेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब पंजाब से राज्यसभा सांसद और शिक्षाविद् अशोक कुमार मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी ने सचिवालय से यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए पार्टी के आवंटित समय में से हिस्सा न दिया जाए। राजनीतिक गलियारों में इसे राघव चड्ढा के पर कतरने और पार्टी नेतृत्व की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है।
पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियों की खबरें आ रही थीं। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण माने जा रहे हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को शराब नीति मामले में कानूनी राहत मिलने के बाद भी राघव चड्ढा की ओर से कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं आई थी। हाल के महत्वपूर्ण आंदोलनों और असम जैसे राज्यों में चुनाव प्रचार की स्टार प्रचारक सूची से भी उनका नाम गायब था। सियासी चर्चाओं में उनके पाला बदलने की अटकलें भी तेज थीं, हालांकि संजय सिंह जैसे नेताओं ने इसे खारिज किया था। लेकिन, हालिया फैसले ने इन चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है।
राघव चड्ढा की जगह लेने वाले अशोक कुमार मित्तल पंजाब के जालंधर से आते हैं। वे देश की प्रतिष्ठित ‘लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी’ (LPU) के संस्थापक कुलाधिपति हैं। वे 2022 में AAP के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे। सदन में रक्षा और वित्त जैसी महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे हैं। हाल ही में उन्हें भारत-यूएसए संसदीय मैत्री समूह का सदस्य भी बनाया गया था। राघव चड्ढा, जो कभी पार्टी के सबसे युवा और प्रखर चेहरों में गिने जाते थे, उनका इस तरह पद से हटना AAP की आंतरिक राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। अब देखना यह होगा कि क्या यह केवल एक रणनीतिक फेरबदल है या राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के रास्ते अब स्थायी रूप से अलग होने की दिशा में बढ़ रहे हैं।