बीस सालों में इस वर्ष पहली बार पटना के गांधी मैदाना में आयोजित ईद वाली नमाज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमान नहीं पहुंचे। यह पहला मौका है जब सीएम नीतीश कुमार ईद के मौके पर गांधी मैदान में ईद मिलन समारोह में शामिल नहीं हुए और उनकी जगह आज उनके बेटे निशांत कुमार ने यह जिम्मेदारी संभाली और लोगों को ईद की बधाई दी। इस दौरान निशांत काफी ऐक्टिव दिखे। निशांत के साथ इस मौके पर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और अन्य अधिकारी भी थे। गांधी मैदान में बने मंच पर मुस्लिम नेताओं ने निशांत को गमछा देकर उनका स्वागत किया। एक युवक ने निशांत कुमार को तिरंगा झंडा भी भेंट किया। निशांत कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से मैं बिहार वासियों को ईद की मुबारकबाद देता हूं। उधर खबर है कि आज मुख्यमंत्री नीतीश ने फुलवारी शरीफ स्थित खानकाह मुजीबिया का दौरा किया और लोगों को ईद की बधाई दी
मुख्यमंत्री नीतीश के ईद के मौके पर फुलवारी शरीफ खानकाह के प्रबंधक मौलाना मिन्हाजुद्दीन कादरी मुजीबी और नगर सभापति मो. आफताब आलम ने उन्हें टोपी और गमछा पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री सज्जादा नशीं के हुजरे में पहुंचे और उनसे लगभग 10 मिनट तक मुलाकात की। मुख्यमंत्री लगभग 10 मिनट तक खानकाह परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लोगों का अभिवादन किया और हाथ हिलाकर ईद की मुबारकबाद दी। वहां उन्होंने कहा कि खुदा इस मुबारक दिन पर हम सब पर अपनी रहमतों की बारिश करें और राज्य में सुख, शांति एवं समृद्धि आए। इसपर वहां लोगों ने मुख्यमंत्री के समर्थन में नारे और उनसे बिहार छोड़कर राज्यसभा नहीं जाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन किया और आगे बढ़ गए। सीएम के आगमन को लेकर खानकाह एवं आसपास के इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
इधर सीएम नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी ईद के मौके पर प्रदेश एवं देशवासियों को तथा विशेषकर मुस्लिम भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि—’खुदा इस मुबारक दिन पर हम सब पर अपनी रहमतों की बारिश करें और राज्य में सुख, शांति एवं समृद्धि आए। वहीं जनता दल यूनाईटेड की तरफ से भी पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा गया कि बिहार आज सामाजिक सद्भाव का जीवंत उदाहरण बन चुका है। नीतीश कुमार जी ने सभी वर्गों और समुदायों को साथ लेकर विकास की राह तय की है। कब्रिस्तानों की सुरक्षा और अतिक्रमण रोकने के लिए मजबूत घेराबंदी सुनिश्चित की गई है।