नवादा : जिले के विभिन्न जंगलो में हरे पेड़ो व झाड़ियों की कटाई तेज हो गई है। ऐसा तब होने लगा है जब गाड़ी देशों में युद्ध के कारण रसोई गैस के मूल्यों में इजाफा के साथ साथ गैस सलेंडर कि किल्लत होने लगी है। वैसे गैस वितरकों का दावा है कि क्षेत्र के ग्रामीण व शहरी गैस उपभोक्ताओं को गैस की कमी नहीं होने दी जायेगी। बावजूद ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं दिन भर जंगलों में जाकर लकड़ी काटकर बोझा बनाकर उसे ढोकर घर ला रही है और फिर उसे सप्ताहिक बाजारों में बेच कर उससे प्राप्त पैसे से अपने घरों कि जरूरतों को पुरा कर रही है।
यह हाल सर्वाधिक हेमजा भारत, बंगलापर, शेरपुर, शाहपुर, चैली, चपरी, रजौंध, मँझौली, नवाडीह, जमुनिया, परनाडावर, बलुआ तरी, कोसम्हातरी, मधी क्लोंडी, लबनी, पड़रिया, रामरायचक, कारीगीधी, मोहनरिया बकड़झौली, एकम्बा, चौकिया,सिमरा तांड , कर्मातांड, पोखरिया कोल आदि गांव की सर्वाधिक महिलाएं पास के जंगलों में लगे पेड़ो कि बृहद पैमाने पर कटाई कर जंगल को वीरान सुनसान और मैदान जैसा बना दिया है। अब पहाड़ के उस पार जाकर घने जंगलों को नुक़सान पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय वन विभाग के अधिकारी जंगल की कटाई रोकने को लेकर लगातार छापेमारी कर रही है लेकिन विभागीय कार्यालयों में कर्मी के घोर अभाव एवं दूर दूर में फैले विभिन्न जंगलों में एक साथ वन कर्मी नही पहुंच पाते हैं जिसके कारण जंगलों कि अंधाधुंध कटाई कर ग्रामीण महिला अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में में जुटी है। वन प्रमंडल पदाधिकारी ने बताया कि जंगल कटाई रोकने के लिये लगातार ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वन कटाई करते महिलाओ से टाँगी जप्त कर उन्हें चेतावनी दी जा रही है। पर्याप्त संसाधन नही रहने के बावजूद विभाग लगातार रोकने की कोशिश कर रही है।
भईया जी की रिपोर्ट