पटना : बिहार सरकार द्वारा खुले में मांस और मछली की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के इस आदेश को एक खास वर्ग और धर्म को निशाना बनाने की साजिश करार दिया है। सहनी ने सरकार को नसीहत दी है कि बिना बाजार और बुनियादी ढांचा बनाए गरीब मछुआरों और दुकानदारों पर तानाशाही थोपना बंद करें।
मुकेश सहनी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार हिंदू-मुसलमान का नैरेटिव सेट करने के लिए पहले चिकन-मटन पर आई और अब मछली (मछुआरा समाज) तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि जैसे सबका अपने बाबूजी का राज है, जो मर्जी आए आदेश दे देते हैं। डिप्टी सीएम सोकर उठते हैं और फरमान जारी कर देते हैं कि कोई मछली नहीं बेचेगा।”
उन्होंने अपने मंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि हमने मंत्री रहते हुए 5 हजार करोड़ रुपये का बजट और 5 साल का ब्लूप्रिंट तैयार किया था ताकि पूरे बिहार में व्यवस्थित मछली बाजार बनाए जा सकें। डिप्टी सीएम पहले विभाग में मेरे द्वारा साइन की गई फाइलों को देखें। सरकार का काम सिर्फ प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि व्यवस्था देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को सड़क किनारे मछली बेचने का शौक नहीं है, लेकिन जब बाजार ही नहीं होंगे तो गरीब लोग कहाँ जाएंगे?
सहनी ने उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रतिबंध लागू करने से पहले बिहार के सभी शहरों और ग्रामीण इलाकों में आधुनिक मछली और मांस बाजार का निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि जब उचित जगह मिलेगी, तो लोग खुद-ब-खुद सड़क किनारे से हट जाएंगे। दरअसल, हाल ही में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्वास्थ्य और स्वच्छता का हवाला देते हुए राज्य भर में खुले में मांस-मछली बेचने पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया था। उन्होंने अधिकारियों को इसे सख्ती से लागू करने को कहा है, जिसका अब विपक्षी दल पुरजोर विरोध कर रहे हैं।