– देश में 80 हजार करोड़ का बीज बाजार, जलवायु अनुकूल बीज संरक्षण पर जोर
पटना : प्रकृतिका महोत्सव में जैविक उत्पादों की खरीद और प्राकृतिक व पारंपरिक खेती के तरीकों को समझने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस महोत्सव में आम लोगों के साथ-साथ किसान भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं, जहां उन्हें खेती-किसानी से जुड़ी नीतियों, सरकारी नियमों और पारंपरिक कृषि ज्ञान की जानकारी मिल रही है। महोत्सव में देश के 20 राज्यों से आए जैविक किसान भाग ले रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या महिला किसानों की है। ये किसान रागी, कोदो, अलसी, पारंपरिक जैविक बीजों सहित पूरी तरह जैविक उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। इसके साथ ही लगाए गए फूड स्टॉल्स पर लोग ऑर्गेनिक व्यंजनों का स्वाद ले रहे हैं।
जीएम के बाद जीन एडिटिंग बड़ा खतरा
कृषि विशेषज्ञ रोहित परख ने कहा कि करीब दो दशक पहले भारत में जीएम कॉटन लाया गया था और अब इसके बाद जीन एडिटिंग का कॉन्सेप्ट सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी आवश्यकता और इससे जुड़े आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाना जरूरी है। यूरोप यह स्पष्ट कर चुका है कि जीन एडिटिंग और जैविक खेती साथ नहीं चल सकती। यह भारत के पारंपरिक बीजों और उनके संरक्षण के लिए गंभीर खतरा है, जिस पर किसानों को जागरूक करने की आवश्यकता है। महोत्सव के दौरान आयोजित सत्रों में खेती में श्रम, छिपी बेरोजगारी, कृषि नीतियां, महिला किसानों की स्थिति, बीज संसाधन और व्यापार, बीज बाजार का भविष्य तथा पारंपरिक भोजन जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
80 हजार करोड़ का बीज बाजार
बीज बाजार पर चर्चा करते हुए रामानजनेयुलू ने बताया कि देश में बीजों का कुल बाजार लगभग 80 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें करीब 50 हजार करोड़ रुपये का बाजार असंगठित है। लगभग 35 प्रतिशत बीज बाजार हाइब्रिड बीजों का है, जिसके कारण बड़ी कंपनियों की इस क्षेत्र में भागीदारी बढ़ रही है।
कृषि में सोलर ऊर्जा की जरूरत
खाद्य प्रणालियों में ऊर्जा के समावेश पर आयोजित सत्र में आगा खान फाउंडेशन के नवनीत ने कहा कि छोटे किसान सिंचाई के लिए पानी खरीदने को मजबूर हैं, जिससे बिजली का खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में कृषि में सोलर ऊर्जा के उपयोग से किसानों को सीधा लाभ हो सकता है। असर संस्था से जुड़े मुन्ना झा ने कहा कि बिहार में फोटोवोल्टिक तकनीक के जरिए जमीन के दोहरे उपयोग की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन यह तकनीक अभी नई है।
इसके लिए राज्य में स्पष्ट नीति और किसानों के बीच जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि खेती में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी को सामाजिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है, खासकर बिहार जैसे छोटे किसानों वाले राज्यों के लिए। वेंकी रामचंद्रन ने कहा कि खेती में इस्तेमाल होने वाले सोलर सिस्टम में ग्लास पैनल का उपयोग जरूरी है, क्योंकि पॉलिमर पैनल से निकलने वाला माइक्रोप्लास्टिक लंबे समय में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
किसानों को मिला सम्मान, लोक संगीत से सजी शाम
महोत्सव के अंतिम सत्र में आयोजक टीम की ओर से 10 जैविक किसानों को सम्मानित किया गया, जो जैविक खेती के विभिन्न क्षेत्रों और फसलों पर उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। शाम को कलाकारों ने कबीर भजन और बिहार के लोक गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया।