पटना : राज्य में खनिज राजस्व की वसूली और वित्तीय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए बिहार सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा ने सभी जिलों के खनिज विकास पदाधिकारियों (MDO) के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान राजस्व संग्रह में सुस्ती बरतने वाले जिलों के खिलाफ निदेशक ने सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
वहीँ, लक्ष्य से पीछे चल रहे लखीसराय, गया, मुंगेर और वैशाली के खनिज विकास पदाधिकारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने का निर्देश दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्यों और दैनिक प्रगति की समीक्षा के बाद निदेशक ने स्पष्ट किया कि राजस्व संग्रहण में किसी भी तरह की शिथिलता बर्दाश्त नहीं होगी। लक्ष्य पूरा न करने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिन जिलों ने लक्ष्य हासिल कर लिया है, उन्हें भी प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखने को कहा गया है।
विभागीय स्तर पर बालू घाटों की नीलामी और उनके सुचारू संचालन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इसके अलावा जिन बालू घाटों को वापस लिया गया है, उनकी नीलामी प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए। ईंट-भट्ठों से होने वाले भुगतान और पर्यावरणीय स्वीकृति (EC/CTO) से जुड़े लंबित मामलों को जल्द निपटाने का आदेश दिया गया। बड़े जिलों में विशेष अभियान चलाकर रॉयल्टी और जुर्माने की बकाया राशि वसूलने की हिदायत दी गई।
बैठक का समापन करते हुए निदेशक ने कहा कि राज्य के विकास कार्यों को गति देने के लिए खनिज राजस्व में वृद्धि अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध तरीके से निविदाएं पूरी करने का मूल मंत्र दिया। वहीं, सरकार के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में अवैध खनन पर लगाम कसने और राजस्व वसूली में तेजी लाने के लिए फील्ड अधिकारियों पर दबाव बढ़ेगा।