सीतामढ़ी में साइबर पुलिस ने बिहार के एक नए ‘नटवरलाल’ को दबोच कर करोड़ों की ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। करोड़ों की ठगी में जिस शख्स को गिरफ्तार किया है, वह पहचान बदलने में इतना महिर है कि लोग सहज ही धोखे में आ जाते हैं। जानकारी के अनुसार सीतामढ़ी साइबर सेल की पुलिस ने जिले के सुप्पी थानांतर्गत मोहिनी मंडल गांव में छापेमारी कर महेश मुखिया को धर दबोचा। उसके घर से तलाशी में पुलिस को महाराष्ट्र के डीजीपी की फर्जी आईडी समेत कई आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद हुई। उसके पास से लैपटॉप, नकदी, कई फर्जी भारतीय और नेपाली सिम कार्ड भी पुलिस को मिले। बताया जाता है कि हाल में उसने मुजफ्फरपुर के एक शख्स को फैक्ट्री में टेंडर दिलाने के नाम पर 40 लाख की ठगी का शिकार बनाया था।
सीतामढ़ी साइबर डीएसपी ने बताया कि मुजफ्फरपुर के औराई थाना क्षेत्र निवासी सुधीर साहनी नामक एक व्यक्ति ने सुप्पी थाना में मोहिनी मंडल गांव के महेश मुखिया पर उससे 40 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महेश मुखिया ने फैक्ट्री में टेंडर का लाइसेंस बनवाने के नाम पर उससे 40 लाख ऐंठ लिये। इसके बाद मामले की जांच की गई जिस दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस ने जब उसके घर रेड मारी तो वहां उसके कमरे से डीआईजी का एक जाली आईकार्ड, एक मोबाइल, एक टैबलेट, नगद डेढ़ लाख रुपये, 14 सिमकार्ड, 10 डेबिट कार्ड, चेकबुक समेत अन्य चीजों को जब्त किया गया। जब्त सिमकार्ड में कुछ नेपाली हैं। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि डीआईजी का फर्जी आईडी कार्ड दिखा कर उसने कितनों को और कहां—कहां शिकार बनाया है।
महेश मुखिया की ठगी का शिकार हुए शख्स ने बताया कि उसने फैक्ट्री का टेंडर लाइसेंस पाने के लिए जमीन बेची और फिर भी रकम नहीं जुटी तो कर्ज पर पैसे लेकर उसे दिए। उसने पुलिस को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके से पैसों के लेन-देन के सबूत पुलिस को दिये। उसने बताया कि 40 लाख देने के बाद भी महेश मुखिया उससे और पैसे डिमांड कर रहा था। जल्द ही उसे खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ जिसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार नटवरलाल से पूछताछ कर रही है। ठगी के इस पूरे मामले को एक बड़े रैकेट से जोड़कर भी जांच की जा रही है।