By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Swatva Samachar
Notification
  • Home
  • देश-विदेश
  • राज्य
  • राजपाट
  • खेल-कूद
  • मनोरंजन
  • अपराध
  • अर्थ
  • अवसर
  • आप्रवासी मंच
    • बिहारी समाज
  • मंथन
  • वायरल
  • विचार
  • शिक्षा
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
  • E-Magazine
Font ResizerAa
Swatva SamacharSwatva Samachar
  • देश-विदेश
  • राजपाट
  • खेल-कूद
  • मनोरंजन
  • अपराध
  • अर्थ
  • अवसर
  • आप्रवासी मंच
  • बिहारी समाज
  • मंथन
  • वायरल
  • विचार
  • शिक्षा
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Search
  • About us
  • Advertisement
  • Editorial Policy
  • Grievance Report
  • Privacy Policy
  • Terms of use
  • Feedback
  • Contact us
Follow US
लेटेस्ट न्यूज़

डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद के उपन्यास आज के दौर में अति प्रासंगिक: अवधेश नारायण सिंह

Swatva Desk
Last updated: July 12, 2026 10:10 pm
By Swatva Desk 154 Views
Share
8 Min Read
SHARE

ऐतिहासिक उपन्यास ‘तख़्ते ताऊस’ पर संगोष्ठी एवं ‘आचार्य भर्तृहरि और उनका वाक्यपदीयम्’ विषय पर व्याख्यान

पटना: “साहित्यकार के लिए कल्पना-शक्ति होना अति आवश्यक होता है। शत्रुघ्न प्रसाद जीवन और साहित्य दोनों में अनुशासन के पैरोकार थे। मैं अपने जीवन में उनके अनुशासन को हमेशा निभाने का प्रयास करता हूंँ।” ये बातें आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद शोध संस्थान, पटना एवं श्री अरविंद महिला कॉलेज, पटना के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित व्याख्यानमाला की चौथी शृंखला के कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहीं। रविवार को यह व्याख्यानमाला पटना स्थित श्री अरविंद महिला कॉलेज के सभागार में आयोजित की गई, जिसमें डॉ. शत्रुघ्न प्रसाद के उपन्यास ‘तख्ते ताऊस’ और ‘आचार्य भर्तृहरि और उनका वाक्यपदीयम्’ विषयक दो सत्रों में विमर्श हुआ। उद्घाटन सत्र में श्री सिंह ने आचार्य जी के साथ बीते दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे वे हमेशा समाज और राष्ट्र के लिए चिंतित रहते थे। उन्होंने उपन्यास के केंद्र-बिंदु विषय मुगल आक्रांताओं द्वारा देश में बलात् धर्म-परिवर्तन करना और महिलाओं के चरित्र-हनन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शत्रुघ्न प्रसाद चाहते थे कि उनकी लेखनी से वर्तमान पीढ़ी विगत इतिहास के उन अमानवीय पक्ष को जाने, जिसकी कीमत हमारे पूर्वजों ने जान पर बाजी लगाकर चुकाई। उनके उपन्यास के विषय आज के दौर में अति प्रासंगिक हैं। इस सत्र में कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रेखा रानी ने अतिथियों को अंगवस्त्रम् और महर्षि अरविंद का प्रतीक-चिह्न देकर सम्मानित करते हुए अपने स्वागत भाषण में कहा कि ऐसे महान विभूति के साहित्यिक कर्म पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है।

- Advertisement -

प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के पूर्व आचार्य प्रो. सदानंद गुप्त ने ‘तख़्ते ताऊस’ उपन्यास की कथावस्तु पर विशद विमर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “शत्रुघ्न प्रसाद ने अपनी रचनाधर्मिता के माध्यम से राष्ट्रीय स्वत्व का प्रसार किया है। वे इतिहास को उसकी निरंतरता में देखने के आकांक्षी थे। अपने ऐतिहासिक उपन्यासों में वे अपनी धरती और अपनी संस्कृति से प्रेम करनेवाले लेखक के रूप में दिखाई देते हैं। उनके उपन्यास ‘तख्ते ताऊस’ औरंगजेब के समय के इतिहास को प्रस्तुत करता है, जिसमें सतनामी संप्रदायों, शिवाजी और भारत की संघर्षशील परंपरा का चित्रण किया है। यह उपन्यास अपने मूल उद्देश्यों में आज भी प्रासंगिक है।” इस सत्र की अध्यक्षता बिहार विधान परिषद् में सत्तारूढ़ दल के उपनेता प्रो. राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि शत्रुघ्न प्रसाद ने राष्ट्रीय एकता को ध्यान में रखकर रचनाधर्मिता की है, जो आज भी हमारे लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जिस प्रकार आदिगुरु शंकराचार्य ने सनातन परंपरा की संरक्षा के लिए देश के चार भागों में पीठों की स्थापना की, उसी प्रकार शत्रुघ्न प्रसाद ने नालंदा, कश्मीर, उज्जयनी, पंजाब, श्रावस्ती, राजस्थान आदि स्थलों के कथानकों को अपने उपन्यासों में स्थान देकर पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोया है।

प्रथम सत्र के प्रारंभ में आचार्य शत्रुघ्न शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रो. अनीता ने विषय-प्रवर्तन किया।
इस सत्र में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद के उपन्यासों पर शोधकार्य कर रहे चार शोधार्थियों – विवेक त्रिपाठी, राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश, सौरभ मोराले, दिल्ली विश्वविद्यालय; चंदन कुमार पासवान, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा और प्रदीप कुमार अवस्थी, जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा को ‘आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद रचना-सम्मान’ से सम्मानित किया गया, जिसमें उन्हें प्रशस्ति-पत्र, प्रतीक-चिह्न और अंगवस्त्रम् प्रदान किया गया। इन चारों ने संक्षेप में शत्रुघ्न प्रसाद की कृतियों पर‌ केंद्रित अपना वक्तव्य भी प्रस्तुत किया। इसमें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने अपने वक्तव्य में आचार्य भर्तृहरि और आचार्य शत्रुघ्न प्रसाद के व्यक्तित्व और लेखन का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए उनकी ऐतिहासिक दृष्टि की विशेषताओं को भी रेखांकित किया। इस सत्र में प्रसिद्ध चिकित्सक प्रो. विजयेन्द्र कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस सत्र का संचालन डॉ. अजय कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अरुण कुमार ने दिया।

द्वितीय सत्र का विषय था – ‘आचार्य भर्तृहरि और उनका वाक्यपदीयम्’। अपने बीज वक्तव्य में वरिष्ठ साहित्यकार और भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी रणेन्द्र कुमार ने कहा कि ‘भर्तृहरि का वाक्यपदीयम्’ भाषाचिंतन की महत्त्वपूर्ण पुस्तक है। इस पुस्तक का विदेशों पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के संस्कृत विभाग के आचार्य एवं संकायाध्यक्ष प्रो. रजनीश कुमार मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि पूरी दुनिया के भाषाचिंतन की पृष्ठभूमि तैयार करने में भर्तृहरि ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिंतन का प्राथमिक माध्यम भाषा है, यह बात भर्तृहरि ने पूरी दुनिया को 5वीं शताब्दी में ही बताई। ज्ञान, भाषा और सत्ता का आपस में गहरा संबंध है। सत्ता को भाषा ने निर्मित किया है। प्रो. मिश्र ने कहा कि आचार्य भर्तृहरि ने ‘वाक्यपदीयम्’ की पहली कारिका में ही शब्द और ब्रह्म के अंत: संबंध को स्थापित कर दिया था।
इस सत्र के अध्यक्षीय वक्तव्य में श्री अरविंद महिला कॉलेज की प्राचार्या प्रो. रेखा रानी ने कहा कि आचार्य भर्तृहरि संस्कृत व्याकरण को समृद्ध करनेवाले विद्वान् शास्त्रज्ञ थे। उन्होंने वर्णमाला की विशेषताओं को पुनः स्थापित करते हुए नवीन चिंतन दिया।उनका चिंतन आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। इस सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहार लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो. अरुण कुमार भगत भी मौजूद रहे। शत्रुघ्न प्रसाद शोध संस्थान के महासचिव डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम में बिहार के कई विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी और साहित्यकारों ने भाग लिया। इस सत्र का संचालन डॉ. आशा कुमारी ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रशांत ने किया। डॉ. प्रिया कुमारी ने पूरे आयोजन का सफल संयोजन किया। इस संगोष्ठी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय आदि संस्थानों से 200 से अधिक शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लिया। इस संगोष्ठी में डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता, डॉ. अमित कुमार, डॉ. शारदा कुमारी, डॉ. शोभित कुमार, डॉ. वीरेंद्र कुमार यादव, डॉ. अविनाश, डॉ बेबी, डॉ. सुनील, डॉ. रमेश, डॉ. माधवी, डॉ. मनोज, डॉ. इंदिरा आदि उपस्थित थे।

- Advertisement -
TAGGED: Awdhesh Narayan Singh, शत्रुघ्न प्रसाद
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn Telegram Copy Link
Did like the post ?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमने पुरानी ख़बरों को आर्काइव में डाल दिया है, पुरानी खबरों को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कर। Read old news on Archive

Live News

- Advertisement -

Latest News

एक्स-रे के दौरान महिला का मंगलसूत्र गायब, सीसीटीवी भी बंद 
बिहारी समाज
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG विवाद के बीच दिया इस्तीफा, प्रधानमंत्री को भेजा त्यागपत्र
बिहारी समाज
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, राजनीतिक गलियारों में हलचल
लेटेस्ट न्यूज़
तीन दशक से छात्रावास पर कब्जे के खिलाफ आंदोलन का ऐलान, 15 सदस्यीय निगरानी समिति गठित
बिहारी समाज
- Advertisement -

Like us on facebook

Subscribe our Channel

Popular Post

एक्स-रे के दौरान महिला का मंगलसूत्र गायब, सीसीटीवी भी बंद 
बिहारी समाज
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG विवाद के बीच दिया इस्तीफा, प्रधानमंत्री को भेजा त्यागपत्र
बिहारी समाज
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, राजनीतिक गलियारों में हलचल
लेटेस्ट न्यूज़
तीन दशक से छात्रावास पर कब्जे के खिलाफ आंदोलन का ऐलान, 15 सदस्यीय निगरानी समिति गठित
बिहारी समाज
- Advertisement -
- Advertisement -

Related Stories

Uncover the stories that related to the post!
लेटेस्ट न्यूज़

धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, राजनीतिक गलियारों में हलचल

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से…

By Swatva
भूमिहार, ब्राह्मण, विधानसभा, जीवेश मिश्रा, डिप्टी सीएम
बिहारी समाज

भूमिहार ब्राह्मण या केवल भूमिहार, सदन में डिप्टी सीएम से भिड़ गए बीजेपी विधायक

बिहार में जातिगत सर्वे के नाम पर हुई जातीय जनगणना के बाद…

By Amit Dubey
मृत्युंजय तिवारी, थामा कमल, BJP, ज्वाइन, RJD प्रवक्ता
देश-विदेश

RJD प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने थाम लिया कमल, अब BJP के लिए ही जिएंगे और मरेंगे

राजद से इस्तीफा देने के बाद मृत्युंजय तिवारी ने आज शुक्रवार को…

By Amit Dubey
विधानसभा, छात्र आंदोलन, हंगामा, वेल, नारेबाजी, स्पीकर, सदन, स्थगित
देश-विदेश

छात्रों के आंदोलन पर विधानसभा में हंगामा, वेल में नारेबाजी…स्पीकर ने सदन किया स्थगित

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के आज पांचवें और आखिरी दिन छात्रों…

By Amit Dubey
Show More
- Advertisement -

About us

पत्रकारों द्वारा प्रामाणिक पत्रकारिता हमारा लक्ष्य | लोकचेतना जागरण से लोकसत्ता के सामर्थ्य को स्थापित करना हमारा ध्येय | सूचना के साथ, ज्ञान के लिए, गरिमा से युक्त |

Contact us: [email protected]

Facebook Twitter Youtube Whatsapp
Company
  • About us
  • Feedback
  • Advertisement
  • Contact us
More Info
  • Editorial Policy
  • Grievance Report
  • Privacy Policy
  • Terms of use

Sign Up For Free

Subscribe to our newsletter and don't miss out on our programs, webinars and trainings.

[mc4wp_form]

©. 2020-2024. Swatva Samachar. All Rights Reserved.

Website Designed by Cotlas.

adbanner
AdBlock Detected
Our site is an advertising supported site. Please whitelist to support our site.
Okay, I'll Whitelist
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?