किशनगंज के निलंबित SDPO गौतम कुमार के साथ ही अब किशनगंज में तैनात एक SHO इंस्पेक्टर के बीच गहरे सांठगांठ का पर्दाफाश EOU (आर्थिक अपराध इकाई) ने किया है। जांच में यह सामने आया है कि दोनों अधिकारियों ने बालू, पशु, लॉटरी, कोयला और तथाकथित ‘एंट्री’ माफिया से साठगांठ कर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की। इन अवैध गतिविधियों के जरिए न केवल नियमित उगाही की जाती थी, बल्कि क्षेत्र में संगठित अपराध को बजाप्ता संरक्षण भी दिया जाता था। इसी सिलसिले में EOU ने किशनगंज में थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन के खिलाफ बड़ी छापेमारी करते हुए पटना, छपरा और किशनगंज समेत पांच ठिकानों पर एक साथ दविश दी। ईओयू की इस ताजा कार्रवाई ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। साथ ही SHO के खिलाफ आय से कई गुना अधिक संपत्ति होने का भी पता चला है।
EOU की कार्रवाई में निलंबित SDPO गौतम कुमार और इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन के बीच गहरे संबंध की भी जांच हो रही है। सूत्रों के मुताबिक इस कनेक्शन से पूरे मामले के और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। पता चला है कि इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन निलंबित SDPO गौतम कुमार का बेहद करीबी रहा है। जांच एजेंसी अब इस एंगल को भी खंगाल रही है कि क्या दोनों के बीच किसी तरह का समन्वय या प्रभाव का नेटवर्क काम कर रहा था। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन लगातार मिल रहे इनपुट्स ने जांच की दिशा को और व्यापक बना दिया है। EOU ने इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में करीब 1.70 करोड़ रुपये की ऐसी संपत्ति सामने आई है, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 115.66 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य मिले हैं, जो बड़ी मात्रा में संपत्ति की ओर इशारा करते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुल संपत्ति का आंकड़ा 50 से 60 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। कई संपत्तियां बेनामी होने की आशंका जताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि इंस्पेक्टर रंजन ने बिहार के अलावा अन्य राज्यों में भी निवेश किया है। पटना के रामकृष्णानगर में चार मंजिला मकान, छपरा में घर और मुजफ्फरपुर में जमीन के अलावा सिलीगुड़ी और दार्जिलिंग में भी संपत्ति होने के संकेत मिले हैं, जबकि कई संपत्तियां रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी गई हैं। जानकारी मिली है कि इंस्पेक्टर ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर में भी निवेश किया है और कई ट्रकों का मालिकाना हक होने की बात सामने आई है। इसके अलावा बैंक खातों, बीमा, शेयर और म्यूचुअल फंड में भी निवेश के दस्तावेज मिले हैं।