राज्यसभा चुनाव के लिए बिहार में अभी तक नामों की घोषणा किसी गठबंधन ने नहीं की है, लेकिन अटकलबाजियां दोनों तरफ चरम पर हैं। सियासी चर्चाओं में संभावित उम्मीदवारों के नाम तैर रहे हैं, जबकि इन्हीं अटकलों के बीच भोजपुरी गायक गुंजन सिंह ने एक बड़ा दावा कर सनसनी मचा दी कि पवन सिंह का बीजेपी की तरफ से राज्यसभा जाना तय है। वैसे तो बिहार के दोनों बड़े गठबंधनों में कई नामों पर चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक किसी का भी नाम कंफर्म नहीं घोषित किया गया है। राज्यसभा का चुनाव 16 मार्च को होना है और नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च है। 4 मार्च को होली है, इसलिए संभावना है कि नामांकन के आखिरी दिन ही दोनों गठबंधनों के उम्मीदवारों के नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक होंगे।
एनडीए की बात करें तो इस बाच के रास चुनाव में उसके खाते में स्पष्ट रूप से 4 सीटें जाती दिख रही हैं। लेकिन 5वीं सीट पर भी कब्जा की एनडीए तैयारी कर रहा है। उधर 5वीं सीट के लिए महागठबंधन ने भी 6ठा उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। परंतु इसके लिए बहुमत का आंकड़ा न तो एनडीए के पास है, न महागठबंधन के पास। महागठबंधन के महज 35 एमएलए ही हैं जबकि 5वीं सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का आंकड़ा होना जरूरी है। कमोबेश इस 5वीं सीट के लिए एनडीए की भी यही स्थिति है। उसे भी 3—4 विधायकों के क्रॉसवोटिंग की जरूरत पड़ने वाली है। इसमें दोनों गठबंधनों के लिए ओवैसी की पार्टी के पांच और बसपा के एक विधायक का सपोर्ट जरूरी हो जाता है। वहीं दोनों गठबंधनों में उम्मीदवारी के लिए भी मारामारी मची है। खासकर एनडीए में।
राज्यसभा चुनाव का ऐलान होने से काफी पहले से ही एनडीए के दो घटक दल बीजेपी को उसके वादे याद दिला रहे हैं। जबकि बीजेपी की इसपर चुप्पी उनकी धड़कने बढ़ा रही है। 26 फरवरी से राज्यसभा के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 16 मार्च को बिहार से खाली हुए सभी पांच सीटों पर चुनाव है। इसको लेकर सहयोगी लगातार बीजेपी पर दबाव बना रहे हैं। बिहार कोटे से जो 5 सीटें खाली हो रही हैं उनमें से एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की भी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट से चुनाव हारने के बाद बीजेपी ने अपने कोटे से राज्यसभा भेजा था। उनका दावा है कि बीजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वादा किया था कि एक राज्यसभा और एक एमएलसी देंगे। वे बीजेपी को उसके उस वादे को याद दिलाकर अपना दावा ठोंक रहे हैं। इधर, जीतन राम मांझी भी बीजेपी को उसका वादा याद दिलाकर राज्यसभा का एक सीट पर अपना दावा कर रहे हैं।
बहरहाल चुनावी परिदृश्य की बात करें तो बिहार विधानसभा के कुल 243 में से 202 सीट पर एनडीए का कब्जा है। इनमें भाजपा के 89, जदयू के 85, लोजपा-आर के 19, हम के 5 और रालोमो के 4 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट के लिए उसे 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। संख्या बल के हिसाब से एनडीए की 4 सीटों पर जीत पक्की है। इनमें दो जदयू और दो भाजपा कोटे की शामिल है। पांचवी सीट जीतने के लिए एनडीए को तीन अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है। दूसरी ओर, महागठबंधन एक सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने की तैयारी में हैं। इसके लिए महागठबंधन को छह विधायकों के समर्थन की जरूरत है। आरजेडी इसको लेकर ओवैसी और बसपा के संपर्क में है। उनका समर्थन मिल गया तो ठीक अन्यथा पांचवीं सीट पर क्रॉस वोटिंग की संभावना व्यक्त की जा रही है।