जमुहार (नवादा/रोहतास) : ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों को सही समय पर ऑक्यूपेशनल थेरेपी और विशेष शिक्षा दी जाए, तो उनके जीवन कौशल को विकसित कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना पूरी तरह संभव है। यह विचार विशेषज्ञों ने नारायण मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर स्थित नारायण केयर बाल पुनर्वास केंद्र में विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति गोपाल नारायण सिंह ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि नारायण केयर केंद्र विकासात्मक विकारों से जूझ रहे बच्चों के लिए आशा की किरण बना है। यहाँ से प्रशिक्षित बच्चे अब सामान्य विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर स्वतंत्र जीवन जीने की ओर अग्रसर हैं। वहीं प्रो-चांसलर गोविंद नारायण सिंह ने केंद्र द्वारा दी जा रही अत्याधुनिक पुनर्वास सेवाओं की सराहना करते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
औरंगाबाद सदर विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने अपने संदेश में विशेषज्ञों की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी और विशेष शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अपना करियर बनाएं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में न केवल ‘स्वर्णिम आजीविका’ है, बल्कि यह मानवता की सेवा का भी सबसे बड़ा माध्यम है। संस्थान की चिकित्सा निदेशक डॉ. आकांक्षा सिंहने अभिभावकों को मंत्र दिया कि वे बच्चे के विकासात्मक चक्र पर नजर रखें। उन्होंने कहा की यदि बच्चा सुनने, बोलने, प्रतिक्रिया देने या अन्य बच्चों के साथ घुलने-मिलने में देरी करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं और विशेषज्ञों से संपर्क करें।
केंद्र प्रभारी डॉ. अवनीश रंजन ने बच्चों की दिनचर्या सुधारने और उनके व्यवहार में बदलाव लाने में स्पीच और ऑक्यूपेशनल थेरेपी की भूमिका बताई। क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट गुलज़ार अहमद ने बच्चों के व्यवहार प्रबंधन और उनके आहार (डाइट चार्ट) पर विस्तृत जानकारी दी कि बच्चों को क्या खिलाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए। जागरूकता दिवस के दौरान केंद्र पर उपचाराधीन बच्चों ने पेंटिंग, कार्ड मेकिंग और पेपर फ्लावर मेकिंग जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में डॉ. आशीष कुमार, डॉ. अमन, विशेष शिक्षक प्रगति मौर्या, भास्कर कुमार और स्पीच थेरापिस्ट आशीष यादव सहित कई विशेषज्ञों ने अभिभावकों की शंकाओं का समाधान किया।