बक्सर निवासी 90 वर्षीय प्राचार्य रामछबिला बाबू नहीं रहे। पिछले दिनों वाराणसी में उनका निधन हो गया। लेकिन समाज में कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो संसार से जाने के बाद भी कहीं नहीं जाते और अपने कृत्यों के माध्यम से सदैव के लिए अमर हो जाते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व और कृतृत्व वाले रामछबिला सिंह के पार्थिव शरीर को मानवता की सेवा के लिए आईजीआईएमएस पटना को दान कर दिया गया। दधीचि देहदान समिति बिहार के जागरूकता अभियान के फलस्वरुप बक्सर निवासी प्राचार्य 90 वर्षीय रामछबिला सिंह का पार्थिव शरीर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के एनाटोमी विभाग को सौंपा गया।
रामछबिला बाबू ने जीवित रहते कुछ वर्ष पूर्व ही दधीचि देहदान समिति में अपना देहदान का संकल्प पत्र भरा था। ज्ञात हो कि रामछबिला जी बिहार से सटे राज्य उत्तर प्रदेश के गहमर, गाजीपुर में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य के रूप में पद स्थापित थे तथा वे राष्ट्रपति से भी पुरस्कृत थे।
मृतक का देहांत बनारस में हुआ जिसके बाद शरीर को पैतृक गांव बक्सर लाया गया । बक्सर से एम्बुलेंस द्वारा उनका शरीर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान लाया गया। मृतक के शरीर को रिसीव करने के लिए अस्पताल में दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष श्री गंगा प्रसाद, पूर्व राज्यपाल, महासचिव पद्मश्री बीमल जैन, दीघा विधायक माo संजीव चौरसिया,निदेशक डॉ बिंदे कुमार,अधीक्षक एवं सोटो के चेयरमैन डॉ मनीष मंडल,विभागाध्यक्ष एनाटॉमी, डॉ अवनीश कुमार,उपाध्यक्ष डॉ सुभाष प्रसाद, कोषाध्यक्ष प्रदीप चौरसिया बक्सर इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व मेयर श्रीमती मीना सिंह एवं समिति के सदस्यगण एवं मृतक के परिजन भतीजा श्री सुजीत कुमार उनके सुपुत्र श्री अमन कुमार की उपस्थिति में संपूर्ण शरीर को एनाटॉमी विभाग को सौपकर पीड़ित मानवता की सेवा के लिए एक मिसाल कायम किया।
इस मार्मिक घड़ी में अस्पताल परिसर में बैकुंठवासी आत्मा को उपस्थित लोगों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा एक मिनट का मौन रखा गया। समिति के अध्यक्ष- पूर्व राज्यपाल श्री गंगा प्रसाद जी ने श्रद्धांजलि अर्पित की एवं उपस्थित लोगों से आवाहन किया कि मृत्यु के बाद शरीर दान करने का परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत है!