पटना : बिहार विधान परिषद की कार्यवाही सोमवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। सदन की शुरुआत होते ही नीतीश सरकार के कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष ने जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक अलग ही रूप देखने को मिला। नारेबाजी से नाराज नीतीश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और आरजेडी की महिला पार्षदों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ई सबको कुछ आता था?’ ये लोग 15 साल था… कुछ काम नहीं किया। आज देख लीजिए 20 साल में कितना ज्यादा काम हुआ है।
हंगामे की शुरुआत और सीएम का पलटवार
बिहार विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होते ही पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नेतृत्व में आरजेडी की महिला विधान पार्षदों (मुन्नी रजक और उर्मिला ठाकुर) ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष के इस आक्रामक रुख को देख मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना आपा खो बैठे। उन्होंने सभापति से सीधे तौर पर हंगामा करने वालों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की। नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को लेकर कहा, ” ये लड़की है… इसके जो (पति) हट गए… कुछ दिन के बाद तो इसी (राबड़ी को सीएम) को बना दिए। फिर भी कोई काम नहीं हुआ”
’15 साल बनाम 20 साल’ का जिक्र
विपक्ष की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके शासनकाल पर सवाल उठाए। नीतीश कुमार ने कहा कि “ई सब को कुछ आता था? कोई काम किया है? ये लोग 15 साल सत्ता में थे, तब कुछ काम नहीं किया। आज देख लीजिए पिछले 20 साल में कितना ज्यादा काम हुआ है।” उन्होंने राबड़ी देवी के मुख्यमंत्री बनने के दौर का जिक्र करते हुए तंज कसा कि उनके पति (लालू यादव) के हटने के बाद इन्हें जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन काम के नाम पर कुछ नहीं हुआ। उन्होंने पूछा कि क्या महिलाओं के लिए उनके शासन में कोई ठोस काम किया गया था?
केंद्र के सहयोग और विकास का दावा
हंगामे के बीच नीतीश कुमार ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि बिहार आज तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सदन में नारेबाजी करना कोई तरीका नहीं है। सदन में माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब एमएलसी सुनील सिंह ने गृह मंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ही सम्राट चौधरी के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। सभापति द्वारा बार-बार शांति की अपील किए जाने के बावजूद विपक्ष सुनने को तैयार नहीं था।