बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर शुरू हो गया है। CM नीतीश कुमार ने राज्य की सत्ता की कमान छोड़कर देश की राजनीति में सक्रिय होने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्यसभा चुनाव के लिए उनके नामांकन दाखिल करने की खबर ने न केवल सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि ‘नए मुख्यमंत्री’ की तलाश को लेकर कयासों का बाजार भी गर्म कर दिया है। इस बीच, दिल्ली से पटना लौटे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद और पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने इस घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। राबड़ी देवी ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार को “जबरन” कुर्सी से हटाकर बीजेपी मुख्यमंत्री पद हथियाने की साजिश रच रही है।
दरअसल, नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। उनके द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए औपचारिक पर्चा दाखिल करना, जो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। लगभग दो दशकों तक बिहार की कमान संभालने के बाद राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख। जिसके बाद दिल्ली से लौटते ही मीडिया के कैमरों ने लालू यादव को घेर लिया और कई सवाल किये हालांकि वो खामोश रहे, लेकिन इसके बदले पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने मोर्चा संभालाते हुए चौंकाने वाला बयान दिया उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने रहें। भाजपा द्वारा ‘सत्ता हथियाने’ के लिए नीतीश कुमार को दबाव में राज्यसभा भेजा जा रहा है।
वहीं, राजनीतिक गलियारों के बीच नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद सीएम की कुर्सी पर कौन बैठेगा? क्या बीजेपी अपना चेहरा आगे करेगी या जेडीयू के भीतर से ही कोई उत्तराधिकारी चुना जाएगा? इस फेरबदल का जेडीयू-बीजेपी गठबंधन पर क्या असर पड़ेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या यह नीतीश कुमार का स्वेच्छा से लिया गया फैसला है या केंद्रीय राजनीति में उनकी भूमिका तय करने के लिए भाजपा का ‘सॉफ्ट एग्जिट’ प्लान है? इस तरह के कई सवाल है।