पटना : बिहार की सियासत में इन दिनों शह और मात का खेल दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में कदम रखने से जेडीयू में नई ऊर्जा देखी जा रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने भी अपनी किलेबंदी तेज कर दी है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को पार्टी विधायकों की एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
इस बैठक को आगामी राज्यसभा चुनाव और राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति के लिए राजद ने एक बार फिर अमरेंद्र धारी सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है। बैठक में उनकी जीत सुनिश्चित करने और संख्या बल को एकजुट रखने पर मंथन होगा। इसके साथ ही जेडीयू में निशांत कुमार के आधिकारिक प्रवेश के बाद पैदा हुई नई राजनीतिक परिस्थितियों और उसके काट पर चर्चा की जाएगी।
वहीँ, आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय होने और सरकार को घेरने के निर्देश दिए जा सकते हैं। राजद ने अपने वर्तमान सांसद एडी सिंह को दोबारा मैदान में उतारकर यह साफ कर दिया है कि पार्टी अनुभव और आर्थिक-सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दे रही है। एडी सिंह का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, और नामांकन के आखिरी दिन उनके नाम की घोषणा कर विपक्ष ने अपनी चाल चल दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बैठक केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश देने की कोशिश है कि राजद हर मोर्चे पर एकजुट और तैयार है। सत्ता पक्ष की नई रणनीतियों के बीच तेजस्वी यादव की यह बैठक बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ ला सकती है। अब देखना यह होगा कि मंगलवार की इस चर्चा से क्या ठोस निर्णय निकलकर सामने आते हैं और राज्यसभा चुनाव में विपक्ष अपनी एकता को कितनी मजबूती से प्रदर्शित कर पाता है।