पटना : बिहार में सत्ता हस्तांतरण के बाद अब सरकार और संगठन दोनों ही नए कलेवर में नजर आ रहे हैं। जहां, सम्राट चौधरी दिल्ली से ‘ग्रीन सिग्नल’ लेकर सरकार को गति देने की तैयारी में हैं, वहीं नीतीश कुमार अपनी नई टीम के साथ जेडीयू को फिर से नंबर वन बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को अपनी दिल्ली यात्रा पूरी कर पटना लौट आए हैं। उन्होंने कार्यभार संभालने के बाद पहली बार दिल्ली पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की। पटना पहुंचते ही वे सीधे पूर्व सीएम नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास ‘एक अणे मार्ग’ पहुंचे।
दरअसल, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 20 अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना हुए और 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। सीएम बनने के बाद पीएम के साथ उनकी यह पहली औपचारिक भेंट थी। इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार बिहार के विकास कार्यों, केंद्र-राज्य समन्वय और आगामी राजनीतिक लक्ष्यों पर भी गंभीर चर्चा हुई। इस दौरान उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत अन्य दिग्गज नेताओं से भी मुलाकात कर संगठन और सरकार के कामकाज पर फीडबैक साझा किया। बुधवार को पटना हवाई अड्डे पर उतरने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सीधे पूर्व सीएम नीतीश कुमार के आवास पहुंचा।
सम्राट और नीतीश के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात जेडीयू-बीजेपी के बीच बेहतर तालमेल का संकेत है। मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने और राज्यसभा जाने के बाद नीतीश कुमार अब अपनी पार्टी जदयू को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुट गए हैं। नीतीश कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची जारी कर दी है। संगठन को धार देने के लिए संजय झा को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। नई लिस्ट में कुल 24 नेताओं को शामिल किया गया है, जिसमें क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है।