पटना : बिहार की राजनीति में इन दिनों एक ‘वायरल वीडियो’ ने भूचाल ला दिया है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वारयल हो रहा है, जिसमें वे कथित तौर पर गोली चलाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और सत्तारूढ़ राजग (NDA) के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जहाँ, राजद ने इसे सुशासन पर सवाल बताया है, वहीं दानिश रिजवान ने इसे एआई (Artificial Intelligence) की मदद से बनाया गया फर्जी वीडियो करार दिया है।
राजद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस वीडियो को साझा करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के लोग खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इस पोस्ट के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पूरे मामले पर सफाई देते हुए ‘हम’ प्रवक्ता दानिश रिजवान ने शुक्रवार को कहा कि यह वीडियो पूरी तरह से छेड़छाड़ कर बनाया गया है। उन्होंने इसके पीछे ‘एआई’ तकनीक के दुरुपयोग का दावा किया।
रिजवान के मुताबिक यह मामला 2017 की एक घटना से जुड़ा है, जिसकी प्राथमिकी आरा नगर थाने में उनके भाई जमाल अशरफ ने दर्ज कराई थी। उस मामले में गिरफ्तारी भी हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरा के शाहिद अली और उसके साले फैज ने एआई की मदद से वीडियो में बदलाव कर इसे दोबारा प्रसारित किया है। दानिश ने वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाते हुए कहा, “वीडियो में दिख रहा व्यक्ति शारीरिक रूप से मुझसे अलग है। साथ ही, आधे सेकंड में चार राउंड फायरिंग तकनीकी रूप से संभव नहीं लगती।”
उन्होंने राजद नेता तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी के लोग बिना जांचे-परखे फर्जी वीडियो अपलोड कर रहे हैं। आगे तंज करते हुए कहा कि ट्वीट करने से पहले सत्यता की जांच कर लेनी चाहिए। तेजस्वी जी को ऐसे वीडियो डालने से पहले कम से कम देख लेना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी फर्जी वीडियो के आधार पर पूर्व में उनका लाइसेंस रद्द हुआ था, जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने बहाल कर दिया था। यह वीडियो पूरी तरह फेक है और मुझे बदनाम करने के लिए एआई का सहारा लिया गया है।