पटना : पटना के बहुचर्चित नीट छात्रा मामले के मुख्य आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका पर आज स्थानीय अदालत में लंबी बहस हुई। इस दौरान पीड़ित पक्ष के वकील एस० के० पांडेय ने जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले में नया मोड़ ला दिया है। कोर्ट ने दस्तावेजों और दलीलों को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए 12 मार्च (गुरुवार) की तिथि निर्धारित की है। दरअसल, पीड़ित पक्ष का कहना है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं। अब सबकी नजरें 12 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ कोर्ट इन नए तथ्यों पर विचार करेगी।
अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए अधिवक्ता एस.के. पांडेय ने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी अब तक इस मामले को ‘आत्महत्या’ बताकर गुमराह कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वार्डन छात्रा को 6 जनवरी की दोपहर 3:51 बजे सहज हॉस्पिटल ले गई थी, जहाँ बेहोशी का कारण ‘ठंड लगना’ बताया गया। चश्मदीदों के अनुसार वहां छात्रा को पांच बोतल पानी (IV Fluid) चढ़ाया गया, जबकि डॉक्टर ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने कोई इलाज ही नहीं किया। शाम 7:20 बजे जब छात्रा को प्रभात मेमोरियल ले जाया गया, तो वहां ‘नींद की गोलियों के सेवन’ की बात कही गई।
वकील ने सवाल उठाया कि जब वार्डन को नींद की गोलियां 7 जनवरी को सफाई के दौरान मिलीं, तो प्रभात हॉस्पिटल को इसकी जानकारी एक दिन पहले (6 जनवरी) ही कैसे हो गई? वहीं, पीड़ित पक्ष ने आशंका जताई है कि हॉस्टल में एक हाई-प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाया जा रहा था। वकील के अनुसार लड़कियों के खाने में नशे की गोलियां मिलाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। पुलिस का दावा था कि छात्रा ने रात का खाना नहीं खाया था, जबकि छात्रा ने अपनी माँ को फोन पर बताया था कि उसने रात में रोटी और बैंगन की सब्जी खाई थी। आरोपी मनीष रंजन के रसूखदार लोगों से संबंध होने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हॉस्टल के पास अक्सर संदिग्ध लग्जरी गाड़ियां देखी जाती थीं।
अधिवक्ता पांडेय ने कोर्ट को बताया कि इस केस में साक्ष्यों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं। नियमानुसार पीड़ित परिवार का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज होना चाहिए था, जो अभी तक नहीं हुआ है। 6 मार्च को सीबीआई को आवेदन देने के बावजूद इस पर कार्रवाई नहीं की गई। केस से जुड़े गवाहों को जांच एजेंसियों द्वारा डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया गया है।