पटना। बिहार में भूमि विवादों के स्थायी और पारदर्शी समाधान के लिए राज्य सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ कार्यक्रम के दौरान घोषणा की है कि अब एक ही प्रकृति की भूमि शिकायतों पर अलग-अलग निर्णय लेने की परिपाटी समाप्त होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना सरकार की प्राथमिकता है।
उपमुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार में जमीन विवाद केवल कानूनी मसला नहीं है, बल्कि यह लोगों के ‘जमीर’ और सामाजिक शांति से जुड़ा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “बिहार में जमीन विवाद के कारण बहुत लहू बहा है, अब इसे हर हाल में रोकना है ताकि विकास की धारा निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके।” राजस्व महा-अभियान के आंकड़ों को साझा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कुल 46 लाख आवेदनों में से 40 लाख मामले अकेले परिमार्जन और नाम संशोधन से संबंधित हैं।
आगे उन्होंने कहा कि इन लंबित मामलों के कारण किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। प्राप्त 8363 गंभीर शिकायतों में से अब तक 2414 का सफल निष्पादन किया जा चुका है। हमारा लक्ष्य शेष आवेदनों का समय-सीमा के भीतर त्वरित निपटारा करना है।
संवाद कार्यक्रम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अमीन और राजस्व कर्मचारी से लेकर विभाग के प्रधान सचिव, डीएम और कमिश्नर तक मौजूद रहते हैं। पारदर्शिता के लिए अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर खोले गए हैं, जहाँ दूसरे अंचलों के पदाधिकारी भी निगरानी के लिए तैनात रहते हैं। कार्यक्रम से एक दिन पूर्व ही उच्चाधिकारी जिले में पहुंचकर समस्याओं का जमीनी आकलन करते हैं।
उपमुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल को व्यापक समर्थन मिल रहा है। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इसे ‘अत्यंत लोकप्रिय संवाद’ बताया। वहीं, विपक्षी दल राजद के डॉ. सुनील कुमार सिंह ने भी इस पहल की खुले मन से प्रशंसा करते हुए इसे जनहित में एक सकारात्मक कदम करार दिया है। सरकार का उद्देश्य केवल फाइलों का निपटारा करना नहीं, बल्कि जमीन विवादों के कारण होने वाली हिंसा को समाप्त कर किसानों को उनका हक दिलाना है।