पटना/बीकानेर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह अरुण कुमार जी ने कहा कि संघ को सही अर्थों में समझने के लिए उसे केवल पढ़ना या सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी अनुभूति करना आवश्यक है। संघ समाज में परिवर्तन का कार्य करता है और व्यक्ति निर्माण को ही राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव मानता है। बीकानेर प्रवास के दौरान तीन अलग-अलग कार्यक्रमों में सहभागिता करते हुए अरुण कुमार जी ने मेडिकल कॉलेज में युवाओं से संवाद के क्रम में कहा कि संघ समाज में संगठन खड़ा करने वाला नहीं, बल्कि स्वयं समाज का संगठन है।
संघ किसी को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानता और अपने कार्यों का श्रेय लेने के बजाय जागृत एवं संगठित समाज को ही परिवर्तन का वास्तविक कारण मानता है। उन्होंने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्तित्व का समग्र विकास करती हैं और लोगों में राष्ट्र के प्रति गहरा प्रेम एवं दायित्वबोध जागृत करती हैं। युवाओं से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि मौलिक एवं वैज्ञानिक चिंतन अपनी स्व-भाषा में होना चाहिए। साथ ही औपनिवेशिक मानसिकता और पहचानों को त्यागकर हिंदू समाज को विभाजन से बचाने की आवश्यकता है।
वेटेरनरी कॉलेज में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन को संबोधित करते हुए अरुण कुमार जी ने संघ के सौ वर्षों की यात्रा को चार चरणों में विभाजित करते हुए बताया—पहले 25 वर्ष विकास, अगले 25 वर्ष विरोध, फिर 25 वर्ष स्वीकृति और वर्तमान 25 वर्ष व्यापक समर्थन के रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक दौर में संगठन खड़ा करना बड़ी चुनौती था, प्रतिबंधों और विरोध के बाद समाज ने संघ को समझा और स्वीकार किया। आज संघ को व्यापक समर्थन इसलिए प्राप्त है क्योंकि समाज का उस पर विश्वास बना है।
उन्होंने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में कहा कि स्वाधीनता आंदोलन, विभाजन काल में हिंदू पुनर्वास, युद्धों के समय राष्ट्रीय एकता का सुदृढ़ीकरण, आपातकाल का विरोध तथा जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष—हर कालखंड में संघ अग्रणी भूमिका में रहा है। इन कार्यक्रमों में विभाग संघचालक टेकचंद बरड़िया सहित अनेक प्रबुद्धजन, समाजसेवी एवं संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट