पटना : काशी और प्रयाग की तरह राजधानी पटना से मात्र 70 किलोमीटर दूर स्थित बिहार का “काशी” कहलाने वाला अतिप्राचीन अनुमंडल बाढ़ में उत्तरायण गंगा नदी के तट पर अवस्थित उमानाथ मंदिर घाट सहित अन्य गंगा घाटों पर माघी पूर्णिमा के अवसर पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए उनकी सुविधा, सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था संधारण के लिए अनुमंडल पदाधिकारी गरिमा लोहिया ने संबंधित पदाधिकारियों को कई आवश्यक निर्देश दिए हैं।
पावन माघी पूर्णिमा पर स्नान, दान एवं पूजा-अर्चना के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु नगर परिषद अध्यक्ष संजय कुमार उर्फ गाय माता एवं उपाध्यक्ष प्रतिनिधि रवि विद्यार्थी द्वारा बाढ़ अनुमंडल के उमानाथ, अलखनाथ, गौरीशंकर, बनारसी घाट, सीढ़ी घाट, बाल शनिधाम, पोस्ट ऑफिस घाट सहित अन्य गंगा घाटों पर साफ-सफाई के साथ-साथ आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
माघी पूर्णिमा को लेकर दिनांक 27 जनवरी को अनुमंडल पदाधिकारी गरिमा लोहिया की अध्यक्षता में 31 जनवरी से 01 फरवरी तक मेला अवधि के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बाढ़-1 आनंद कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि उमानाथ मंदिर परिसर एवं गंगा घाटों पर मजबूत बैरिकेटिंग, अस्थायी शौचालय, महिलाओं के लिए कपड़ा बदलने हेतु चेंजिंग रूम, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि विस्तारक यंत्र, नियंत्रण कक्ष की स्थापना, वीडियोग्राफर की व्यवस्था, चौक-चौराहों पर ड्रॉप गेट, पार्किंग स्थलों का चिन्हांकन एवं फ्लैक्स, तथा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के विश्राम हेतु टेंट लगाने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त अंचल अधिकारी को घाटों पर गोताखोर एवं आपदा मित्र की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर मेला अवधि में एसडीआरएफ की टीम की तैनाती की जाएगी। साथ ही गंगा नदी में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेला के दिन अति आवश्यक सेवाओं को छोड़कर निजी नावों के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। विधि-व्यवस्था संधारण के लिए मेला क्षेत्र, मंदिर परिसर, आसपास के इलाकों एवं बाढ़ शहर के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर दंडाधिकारियों की नियुक्ति की गई है तथा पूरे मेला क्षेत्र की ड्रोन कैमरे से निगरानी की जाएगी।
मेला अवधि में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने एवं सड़कों पर भारी वाहनों के दबाव को कम करने के उद्देश्य से बाढ़ एनटीपीसी से राख लोड कर निकलने वाले हाइवा वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने का सख्त निर्देश एनटीपीसी प्रबंधन को दिया गया है। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए गठित चिकित्सक दल को मेला स्थल पर आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं एवं एम्बुलेंस के साथ मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि धर्मशास्त्रों के अनुसार पावन माघ माह की पूर्णिमा पर उत्तरायण गंगा में स्नान, दान एवं पूजा-अर्चना को अत्यंत पुण्यदायी एवं फलदायी माना गया है।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट