पटना/बाढ़ : पटना जिले के अथमलगोला प्रखंड की करजान पंचायत विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका के लिए चर्चित रही है। इसी पंचायत के पूर्व मुखिया अलखनिरंजन सिंह उर्फ ‘पांचों बाबू’ अपने हंसमुख स्वभाव, व्यवहार-कुशलता, बेबाक अंदाज और पंचायत के विकास के प्रति समर्पित सोच के कारण ग्रामीणों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिहार की राजनीति में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो करजान पंचायत के पूर्व मुखिया अलखनिरंजन सिंह उर्फ पांचों बाबू को नहीं जानता हो। चाहे होली का अवसर हो या दशहरा का, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भूमिका की हमेशा सराहना होती रही है। पंचायत के किसी भी व्यक्ति को यदि कोई समस्या होती है, तो उसके समाधान के लिए पांचों बाबू हर समय यथासंभव सहयोग करने का प्रयास करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यही उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है।
करजान पंचायत के कई ग्रामीणों का मानना है कि आगामी पंचायत चुनाव में यदि अलखनिरंजन सिंह उर्फ पांचों बाबू चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो वे पुनः पंचायत की सत्ता में वापसी कर सकते हैं।उल्लेखनीय है कि अलखनिरंजन सिंह वर्ष 2011 से 2016 तक करजान पंचायत के मुखिया रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कराए, जिनकी चर्चा आज भी पंचायतवासी उदाहरण के रूप में करते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार के निकट सहयोगी तथा बिहार के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री विजय कृष्ण के करीबी माने जाने वाले पांचों बाबू प्रत्येक वर्ष होली सहित विभिन्न राष्ट्रीय एवं सामाजिक अवसरों पर बड़े आयोजनों के माध्यम से समाज में प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का संदेश देते रहे हैं। निर्विवाद व्यक्तित्व के धनी अलखनिरंजन सिंह उर्फ पांचों बाबू के एक आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो जाते हैं, जो उनके सामाजिक प्रभाव और जनस्वीकार्यता का प्रमाण माना जाता है।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट