राजधानी पटना में आज शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश और बेटे निशांत कुमार के पोस्टर्स लगाए गए। इन पोस्टरों में नीतीश के बेटे निशांत को बिहार का अगला मुख्यमंत्री बताया गया। इसके बाद सियासी अटकलों का दौर शुरु हो गया। जदयू समर्थक चाहते हैं कि यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो उनकी राजनीतिक विरासत परिवार के भीतर ही बनी रहे। पटना में आज लगे पोस्टरों में यही संदेश देने की कोशिश की गई है। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और उन्हें 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे देना है। अगर वे ऐसा नहीं करते तो उनकी राज्यसभा सदस्यता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
अब जदयू कार्यालय में निशांत का जनता दरबार
इधर, निशांत कुमार भी सियासी एंट्री के बाद सार्वजनिक और राजनीतिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं।जदयू की सदस्यता लेने के बाद से वे लगातार पार्टी बैठकों और कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। यही नहीं, अब निशांत कुमार पटना स्थित जदयू कार्यालय में जनता दरबार भी शुरू करने की तैयारी में हैं। जनता दरबार के जरिए वे सीधे आम लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और समाधान की कोशिश करेंगे। हालांकि पार्टी या नीतीश कुमार की ओर से उत्तराधिकार को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पटना में लगे पोस्टर और निशांत की बढ़ती सक्रियता ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा को जरूर हवा दे दी है।
नीतीश की कमी खलेगी, भावुक हुए अशोक चौ.
उधर बिहार सरकार में मंत्री और वरिष्ठ जदयू नेता अशोक चौधरी ने नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने और दिल्ली की सियासत में जाने के सवाल पर कहा कि पूरे बिहार के लोगों को उनकी कमी खलेगी। लोग नहीं चाहते थे कि वह यहां से जाएं। भावुक होते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि हम लोग नहीं चाहते थे कि वह जाएं, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार उनको जाना पड़ेगा। अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि बिहार के विकास की पहचान बन चुके हैं। उनके काम करने के तरीके और प्रशासनिक क्षमता का असर पूरे राज्य पर पड़ा है। जो लोग उन्हें करीब से जानते हैं, वे समझते हैं कि उन्होंने बिहार को किस तरह बदला है। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना कई लोगों के लिए भावनात्मक क्षण है।
निशांत के सीएम बनने में हर्ज क्या…?
नीतीश के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता पर अशोक चौधरी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि निशांत पार्टी और लोगों को समझने के लिए बैठकों में भाग ले रहे हैं। जितना ज्यादा वे कार्यकर्ताओं और जनता के संपर्क में आएंगे, उतना ही बेहतर होगा। निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग और पोस्टर-बैनर लगाए जाने के सवाल पर अशोक चौधरी ने कहा कि कार्यकर्ताओं की अपनी भावनाएं होती हैं। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि जब ऐसे लोग भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं जो मैट्रिक पास नहीं हैं, तो एक इंजीनियरिंग पढ़े-लिखे व्यक्ति को मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं का एक वर्ग चाहता है कि निशांत कुमार आगे बढ़ें और उन्हें भी मौका दिया जाए। कुल मिलाकर अशोक चौधरी के इस ताजा बयान ने बिहार की राजनीति में नए संकेत दिए हैं।