पटना : बिहार की राजनीति में एक युग के अंत और नए अध्याय की शुरुआत के संकेत मिलने लगे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली प्रस्थान और उनके पुत्र निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में बढ़ते कदमों ने राज्य के सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 09 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहाँ वे उच्च सदन (राज्यसभा) के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। लेकिन, इससे पहले नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने संकल्पित होकर अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए लगातार कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक ले रहे हैं।
दरअसल, निशांत कुमार ने आज शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया पलेटफोर्म ‘एक्स’ (X) हैंडल से एक भावुक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पोस्ट साझा किया। उन्होंने राजनीति को ‘जनसेवा का सफर’ बताते हुए अपनी जिम्मेदारियों का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि पार्टी से जुड़ने के बाद से अब तक हर दिन कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से संवाद कर जो अनुभव मिला है, उसने जिम्मेदारियों को और गहराई से महसूस कराया है। आम लोगों की खुशहाली के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य करता रहूंगा, यही मेरा संकल्प है।
मालूम हो कि निशांत कुमार ने कुछ ही समय पहले जेडीयू की प्राथमिक सदस्यता ली है, लेकिन इतने कम समय में ही वे पार्टी के भीतर सबसे पसंदीदा चेहरा बनकर उभरे हैं। जेडीयू के जमीनी कार्यकर्ताओं और कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी और सरकार की कमान निशांत को ही संभालनी चाहिए। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि निशांत में अपने पिता जैसी ही सादगी और विकासपरक सोच है। अनंत सिंह जैसे बाहुबली नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से निशांत को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी की है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है। हालांकि, निशांत कुमार के ताजा ‘संकल्प’ ने यह साफ कर दिया है कि वे अब केवल नीतीश कुमार के बेटे नहीं, बल्कि एक भविष्य के नेता के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके हैं। इसके लिए वे लगातार कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक ले रहे हैं। लेकिन, बिहार की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब 09 अप्रैल के बाद होने वाले बड़े सत्ता परिवर्तन पर टिकी हैं कि एनडीए निशांत कुमार के नाम पर मुहर लगाएगा या बीजेपी का कोई चेहरा सामने आएगा।