नीतीश कुमार ने स्वास्थ्य कारणों और बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। इस मुद्दे पर आज जेडीयू के बड़े पदाधिकारियों, मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के साथ उन्होंने अपने आवास पर एक अहम बैठक बुलाई है जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा के साथ ही वे अपने नेताओं—कार्यकर्ताओं को अपने इस फैसले की वजह भी बतायेंगे। बताया जा रहा है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में नई सरकार में केवल एक ही उपमुख्यमंत्री होगा। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति के तहत ही उन्होंने यह फैसला लिया है। जदयू पार्टी में उनके इस निर्णय पर काफी असंतोष है। नीतीश कुमार के राज्यसभा का पर्चा भरने और उनके दिल्ली जाने की खबरों से हर कोई हैरान और नाराज है। इसे लेकर तमाम पोस्टर और सीएम हाउस के बाहर धरना भी शुरू हो गया है। इसी दुख, असंतोष को देखते हुए नीतीश ने आज की अहम बैठक बुलाई है।
सीएम हाउस के बाहर धरना, प्रदर्शन
दरअसल जदयू नेताओं—कार्यकर्ताओं को इस बात का यकीन ही नहीं हो रहा है कि उनके चहेते नेता कैसे उनसे दूर जा सकते हैं। इसी की एक और बानगी पटना में तब देखने को मिली, जब मुख्यमंत्री आवास के ठीक सामने एक व्यक्ति अनशन पर बैठ गया है। उसका नाम त्रिलोकी दास है और वह खुद को जदयू (JDU) का प्रदेश महासचिव बता रहा है। हाथ में पोस्टर लिए त्रिलोकी दास का कहना है कि हम किसी भी हालत में नीतीश कुमार को राज्यसभा नहीं जाने देंगे। वे बिहार में रहें और बिहार की जनता की सेवा करें। इसके साथ ही त्रिलोकी दास का दावा है कि बिहार में आज जो शांति और विकास दिख रहा है, वह नीतीश कुमार की देन है। उन्होंने साफ किया कि वे किसी भी हालत में यहां से नहीं हटेंगे और जीवन के अंतिम दम तक उनका अनशन जारी रहेगा।
बिहार में ही काम करें नीतीश कुमार
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई है और फिलहाल उन्हें हटाने की कोशिशें जारी हैं। नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नॉमिनेशन पेपर फाइल किया, जो बिहार की पॉलिटिक्स में एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इसी के साथ राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले उनके कार्यकाल का लगभग अंत हो गया। अब राज्य में एक नई सरकार का रास्ता भी साफ हो गया, जिसका नेतृत्व BJP कर सकती है। नीतीश कुमार, जो पिछले हफ्ते 75 साल के हुए, इतिहास में एक होशियार पॉलिटिशियन के तौर पर जाने जाएंगे, जिन्होंने 2005 से रिकॉर्ड 10 बार राज्य सरकार का नेतृत्व किया, इसके बावजूद कि उनकी JDU को राज्य असेंबली में कभी अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। राज्य के लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए नीतीश ने अपने एक पोस्ट में लिखा कि दो दशकों से ज़्यादा समय से, आपने लगातार मुझ पर अपना भरोसा और सपोर्ट दिखाया है, और इसी भरोसे के दम पर हमने बिहार और आप सभी की पूरी लगन से सेवा की हैं। यह आपके भरोसे और सपोर्ट की ताकत है जिसने आज बिहार को विकास और सम्मान का एक नया आयाम पेश करने में मदद की है। नीतीश ने आगे लिखा कि अपनी पार्लियामेंट्री यात्रा की शुरुआत से ही, वह बिहार लेजिस्लेचर के दोनों सदनों के साथ-साथ पार्लियामेंट के दोनों सदनों का मेंबर बनना चाहते थे। इसी ख्वाहिश को ध्यान में रखते हुए, मैं इस बार हो रहे चुनावों में राज्यसभा का मेंबर बनना चाहता हूं।