बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत की सक्रिय राजनीति में एंट्री को लेकर एकबार फिर अटकलों का बाजार बाजार गर्म है। दरअसल बीते दिन पटना में सरस्वती पूजा के अवसरी पर मुख्यमंत्री एक पूजा पंडाल गए जहां उनके पुत्र निशांत पहले से मौजूद थे। निशांत के साथ वहा जदयू के कई वरिष्ठ नेता भी पहले से ही पहुंचे हुए थे। इसीबीच जब सीएम नीतीश वहां आए तब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत के कंघे पर हाथ रखकर कान में कुछ कहा। उनकी यही बातचीत अब एक वीडियो के रुप में सामने आई जिसमें वह निशांत से कह रहे हैं कि—’अब मान जाइए, आज बोल ही दीजिए कि मान जायेंगे’। माना जा रहा कि ललन सिंह निशांत को अब अपने सक्रिय सियासत में एंट्री की बात मान जाने को कह रहे थे।
निशांत के सियासी डेब्यू की चर्चा को तब और बल मिला जब पटना स्थित जदयू कार्यालय के बाहर एक नया पोस्टर भी नजर आया जिसने इस बहस को और हवा दे दी। इन पोस्टरों पर ‘अब नहीं तो कब’ और ‘पार्टी को निशांत कुमार जैसा युवा नेतृत्व चाहिए’ जैसे नारे लिखे देखे गए। ये पोस्टर छात्र जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्णा पटेल की ओर से लगाए गए हैं, जिसमें साफ तौर पर निशांत कुमार से राजनीति में आने की अपील की गई है। पोस्टर लगते ही JDU के अंदर और बाहर दोनों जगह एक बार से उसी सवाल ने जोड़ पकड़ लिया है कि क्या निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री का समय आ गया है।
दरअसल निशांत की सियासी एंट्री न तो वे खुद, न उनके पिता नीतीश कुमार ही कुछ भी बोल रहे। जो भी बयानबाजी इस मुद्दे पर हो रही है, वह छोटे—बड़े जदयू नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से लगाए गए पोस्टरों के माध्यम से ही हो रही है। JDU की छात्र शाखा के बिहार उपाध्यक्ष कृष्णा पटेल द्वारा JDU ऑफिस के बाहर लगाए गए इस ताजा पोस्टर में गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी गई हैं। इसमें एक तरफ CM नीतीश कुमार और दूसरी तरफ उनके बेटे निशांत कुमार की तस्वीर है। पोस्टर पर लिखा है, “अब नहीं तो कब? पार्टी को निशांत कुमार जैसा, युवा नेतृत्व चाहिए अब… मिशन विकसित बिहार – 2035। नीतीश सेवक, मांगे निशांत… नीतीश सेवकों के साथ-साथ पूरा बिहार कर रहा वर्षों से यही इंतजार… बिहार के अगले जेनरेशन की कमान संभालने, कब आएंगे भाई निशांत कुमार…”। साफ है कि पार्टी के अंदर एक धड़ा निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में देखना चाहता है। JDU MLC संजय सिंह ने भी कहा कि अगर निशांत कुमार बिहार की राजनीति में आते हैं तो इसमें कुछ भी असामान्य नहीं होगा। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी के सदस्य पहले से ही चाहते हैं कि निशांत राजनीति में आएं।