पटना : बिहार के सियासी गलियारों में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की खूब चर्चा हो रही है। निशांत कुमार सक्रिय राजनीति और सार्वजनिक चकाचौंध से दूर रहते थे, लेकिन अब न केवल सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं, बल्कि उनकी बढ़ती सक्रियता एक बड़े राजनीतिक संकेत की ओर इशारा कर रही है। इस ईद के अवसर पर निशांत कुमार न केवल गाँधी मैदान तक सिमित रहे बल्कि शहर की विभिन्न दरगाहों और सामाजिक स्थलों पर भी पहुंचे। और आम लोगों से सीधा संवाद किया, बड़े-बुजुर्गों का अभिवादन स्वीकार किया और युवाओं से भी मिले। पार्टी के भीतर इस हलचल को मजबूत संपर्क अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो निशांत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि जमीनी फीडबैक को सीधे नेतृत्व (मुख्यमंत्री) तक पहुँचाने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी बनते जा रहे हैं। निशांत कुमार की सक्रियता के पीछे सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनका जेडीयू (JDU) के पुराने सिपहसालारों और कार्यकर्ताओं से मिलना है। गांधी मैदान और अन्य स्थलों पर उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्री के पुराने सहयोगियों के साथ काफी समय बिताया। राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वे संगठन की नब्ज टटोल रहे हैं। कार्यकर्ताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ा रहे हैं। अनुभवी नेताओं के साथ समन्वय स्थापित कर भविष्य की जमीन तैयार कर रहे हैं।
जहाँ, एक तरफ पार्टी कार्यकर्ता निशांत कुमार की इस नई भूमिका से उत्साहित हैं, वहीं विपक्षी खेमा भी उनकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए है। हालांकि, सरकार के मंत्रियों ने हमेशा इसे निजी और सामाजिक मुलाकातों का हिस्सा बताया है, लेकिन जिस तरह से निशांत कुमार लोगों की समस्याओं को सुन रहे हैं और नेतृत्व से संवाद कर रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि वे अब ‘पर्दे के पीछे’ वाली भूमिका से बाहर आ चुके हैं। क्या नीतीश कुमार ने अपने उत्तराधिकारी को धीरे-धीरे मुख्यधारा की राजनीति के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है? ईद के मौके पर दिखी उनकी यह सक्रियता इसी बड़े बदलाव का ट्रेलर मानी जा रही है।