पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई नीट छात्रा की मौत आत्महत्या है या हत्या, इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस उस अस्पताल गई जहां छात्रा को बेहोशी की हालत में लाया गया था। यहां डॉक्टरों और कर्मियों से पूछताछ के बाद दस्तावेजों को खंगाला गया। इसबीच यह भी खबर है कि जिस दिन छात्रा जहानाबाद से पटना आई, उसी दिन आरोपी हॉस्टल संचालक मनीष भी जहानाबाद से पटना आया था। छात्रा ट्रेन से जहानाबाद से पटना आई थी। जहानाबाद रेलवे स्टेशन पर छात्रा के पिताजी छोड़ने आए थे। छात्रा का मोबाइल लोकेशन उस दिन जहानाबाद से पटना की ओर बताया गया है। जबकि मामले में गिरफ्तार शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन का भी मोबाइल लोकेशन उस दिन जहानाबाद से पटना की ओर आने का है। ऐसे पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह महज एक संयोग था या फिर किसी साजिश के तहत मनीष ने छात्रा के आने वाले दिन ही पटना आने का इरादा किया था।
मानवाधिकार आयोग पहुंचा रेप-हत्या मामला
फिलहाल छात्रा के साथ जो कुछ हुआ वह पोस्टमोर्टम में स्पष्ट हो चुका है। थानाध्यक्ष, एएसपी, एसपी और एसएसपी कार्तिकेय कुमार और प्रभात अस्पताल के डॉक्टर सवालों के कटघरे में है। इसबीच अब इस मामले में मानवाधिकार आयोग की भी एंट्री हो गई है। इसकों लेकर राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग में दो अलग—अलग याचिकाएं दायर की गईं हैं। मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के.झा ने कहा कि नीट छात्रा के शरीर पर चोटों के निशान और अन्य परिस्थितियां यह सवाल खड़े करती हैं कि शुरुआत में इस आपराधिक वारदात को पुलिस द्वारा दबाने का प्रयास क्यों किया गया। मुजफ्फरपुर निवासी मानवाधिकार मामलों के वकील सुबोध कुमार झा ने आयोग में याचिका दायर करने के अलावा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी एक पत्र लिखकर न्याय की मांग की है।
मृतक छात्रा के परिजनों ने लगाए नए आरोप
नीट छात्रा के परिजनों की मांग है कि मामले में अनुसंधान को दिशाहीन करने और भ्रम की स्थिति में लाने के आरोप में संबंधित अधिकारियों को भी अभियुक्त की श्रेणी में लाना चाहिए। हालांकि पटना पुलिस का दावा है कि बहुत जल्द मामले का खुलासा हो जाएगा जो पूरे मामले को ही उलट देगा। पुलिस का कहना है कि मामला अब उस निर्णायक तफ्तीश पर पहुंचता दिख रहा है, जहां एक प्रमाण पूरे केस की दिशा तय करेगा। मालूम हो कि पटना पुलिस शुरू में इसे सुसाइड करार दे रही थी। लेकिन पोस्टमोर्टम रिपोर्ट आने के बाद जब पटना पुलिस की किरकिरी होने लगी तब आननफानन में हॉस्टल मालिक मनीष राज उर्फ़ मनीष कुमार रंजन को पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया। साथ ही आईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। परिजनों का आक्रोश इस बात पर है कि क्या हॉस्टल संचालक नीलम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल और पुत्र अंशु अग्रवाल से पुलिस ने पूछताछ की? अगर पूछताछ की तो क्या जानकारी मिली? और अगर पूछताछ नहीं की तो फिर इनसे पूछताछ में आनाकानी क्यों? आक्रोशित लोगों का सवाल यह भी है कि घटना के अनुसंधान को गलत बयानबाजी से दिशाहीन करने वाली पटना पुलिस आखिर किसके दवाब में है?
तीन एंगल और तीन थ्योरी पर काम कर रही पुलिस
हालांकि घटना के संबंध में पुलिसिया जानकारी बताती है कि जांच अब तीन थ्योरी पर आगे बढ़ रही है। पहली थ्योरी यह है कि छात्रा जिस दिन जहानाबाद से पटना पहुंची, उस वक्त उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति क्या थी? क्या यात्रा के पहले या यात्रा के दौरान कोई असामान्य घटना हुई? दूसरी थ्योरी यह है कि पटना पहुंचने के बाद छात्रा पटना के किसी अन्य लोगों से किसी अन्य जगह पर मुलाक़ात की ? क्या उन स्थानों से लौटने के बाद वह सामान्य अवस्था में हॉस्टल पहुंची थी? और तीसरी थ्योरी यह कि अगर छात्रा हॉस्टल लौटते समय वह पूरी तरह सामान्य थी, तो क्या अपराध या संदिग्ध घटना हॉस्टल परिसर के भीतर, किसी खास कमरे में हुई? इन सभी थ्योरी पर जांच करने के लिए पुलिस तकनीकी, फॉरेंसिक, सीडीआर, मोबाइल टावर लोकेशन, डिलीटेड डेटा और मूवमेंट पैटर्न की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। इसके पीछे का लॉजिक यह है कि पुलिस के अनुसार तीन संभावित घटनास्थल हो सकते हैं। पहला छात्रा के पटना आने से पहले का स्थल, दूसरा पटना आने के बाद एक अन्य स्थान और तीसरा घटनास्थल गर्ल्स हॉस्टल। पुलिस के अनुसार जांच अंतिम पायदान पर है, बस एक प्रमाण का मिलना अब बाकी है।