नवादा : दीपावली व सूर्यषष्ठी का पर्व नजदीक आते ही कुम्हारों के घरों में चाक की रफ्तार तेज हो गयी है। कभी सुस्त पड़ा चाक अब दिन-रात घूम रहा है और कुम्हार मिट्टी को आकार देकर दीपावली की रोशनी तैयार करने में जुटे हैं। शहर के गोंदापुर, कादिरगंज, सद्भावना चौक और डोभरा समेत कई इलाकों में दीये बनाने का काम जोर पकड़ चुका है। बाजारों में भी मिट्टी के दीये, कलश और पूजा में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों की दुकानें सजने लगी हैं। अनुमान है कि जिले में दीपावली के दौरान 20 लाख से अधिक दीयों की खपत होती है। बढ़ती महंगाई और मिट्टी की कमी ने कुम्हारों की चिंता बढ़ा दी है।
दीपावली के साथ छठ महापर्व और कार्तिक महीने में होने वाले विभिन्न पूजा-पाठ को लेकर मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ गयी है। लोग घरों को रोशन करने के लिए मिट्टी के दीये खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। इससे कुम्हारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है। गोंदापुर के कारीगर सुनील पंडित बताते हैं कि नवरात्र शुरू होने के बाद से ही मिट्टी के बर्तनों की मांग बढ़ने लगी थी। अब दीपावली और छठ को लेकर काम और तेज हो गया है। कारीगर दीये, कलश, परई और मिट्टी की कड़ाही बनाने में जुटे हैं। तैयार बर्तनों को सुखाकर बाजार तक पहुंचाया जा रहा है।
कारीगर जयराम पंडित के अनुसार, गोंदापुर में कुम्हार मिलकर करीब तीन से चार लाख दीयों का निर्माण करते हैं। वहीं, कादिरगंज में चार से पांच लाख दीये तैयार किये जाते हैं। सद्भावना चौक और डोभरा के अलावा खरीदी बीघा, गुणावां और वारिसलीगंज से भी कारीगर व विक्रेता बाजार में दीये लेकर पहुंचते हैं। सभी इलाकों के उत्पादन और बिक्री को जोड़ें, तो दीपावली के दौरान जिले में 20 लाख से अधिक दीयों की खपत होती है। बावजूद कई बार पर्व के समय दीयों की कमी हो जाती है।
दीये बनाने के लिए मिट्टी जुटाना अब कुम्हारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जयराम पंडित बताते हैं कि पिछले साल जिस मिट्टी का एक ट्रैक्टर एक हजार रुपये में मिलता था, उसकी कीमत इस साल बढ़कर दो हजार रुपये हो गयी है। पहले मिट्टी आसानी से मिल जाती थी, लेकिन अब महंगे दाम चुकाने के बाद भी इसकी उपलब्धता सुनिश्चित नहीं है। फिलहाल महुली गांव से किसी तरह मिट्टी मंगायी जा रही है। कारीगरों को आशंका है कि आने वाले वर्षों में मिट्टी की कमी और गंभीर हो सकती है। उनके अनुसार, एक ट्रैक्टर मिट्टी से छोटे-बड़े मिलाकर करीब एक लाख दीये बनाये जा सकते हैं।
कारीगर सिद्धेश्वर पंडित के मुताबिक, इस बार बाजार में छोटे दीये 100 रुपये सैकड़ा और मंझला आकार के दीये 150 रुपये सैकड़ा बिकने की संभावना है। वहीं, मिट्टी के घरौंदे के खिलौनों का एक सेट करीब 100 रुपये में बिक सकता है। दीपावली पर मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने से कुम्हारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है। हालांकि, मिट्टी की कीमत दोगुनी होने से लागत बढ़ गयी है। ऐसे में त्योहार की रौनक के बीच कुम्हारों के सामने परंपरागत कारोबार को आगे बढ़ाने और बढ़ती लागत के बीच बेहतर कमाई करने की चुनौती बनी हुई है।
भईया जी की रिपोर्ट