नवादा : हंस चुगेगा दाना तिनका कौआ मोती खायेगा? जी हां! यही तो जिला में हो रहा है। जिला जांच कमिटी द्वारा घोषित फर्जी अनुज्ञप्ति को रद्द करने के बजाय उसे खाद्यान्न की आपूर्ति की आपूर्ति की जा रही है। वह भी नियम के विपरित और सबसे पहले। ऐसे में कहा जाने लगा है ” जिले में भ्रष्टाचार ने सारी सीमाएं तोड़ दी है?” जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं रजौली प्रखंड क्षेत्र के अमांवा पश्चिमी पंचायत पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान का। खाद्य आपूर्ति सचिव के निर्देश पर इनकी फर्जी अनुज्ञप्ति की जांच समाहर्ता ने एक नहीं दो बार करायी।
जांच कमिटी ने अनुज्ञप्ति को फर्जी होने का प्रतिवेदन समाहर्ता के माध्यम से राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव को प्रेषित कर दिया। जांच प्रतिवेदन के आलोक में रजौली एसडीओ ने संबंधित विक्रेता योगेन्द्र पासवान से एक नहीं दो बार स्पष्टीकरण की मांग की। जबाव संतोषजनक नहीं पाये जाने पर रजौली प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने अनुज्ञप्ति रद्द करने की अनुसंशा एसडीओ से की। अनुसंशा एसडीओ के टेबल पर धूल फांक रही है। इस बीच 28 सितंबर को राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव के साथ हुई अंतिम सुनवाई में राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव ने रजौली एसडीओ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अनुज्ञप्ति का फर्जी होना स्वीकार किया।
उन्होंने एसडीएम को पन्द्रह दिनों के अंदर कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए सुनवाई स्थगित कर दिया। बावजूद अनुज्ञप्ति रद्द करने के पांच अक्टूबर को खाद्यान्न विक्रेता के दुकान तक पहुंचा दिया गया। आमतौर पर प्रखंड में महीने के पांच तारीख से रोस्टर के अनुसार खाद्यान्न की आपूर्ति आरंभ कर दी जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल क्या अमांवा पश्चिमी पंचायत के सभी पीडीएस विक्रेताओं के पास खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया? रोस्टर के अनुरूप खाद्यान्न की आपूर्ति आरंभ की गयी? अगर नहीं तो फिर फर्जी अनुज्ञप्ति को रद्द के बजाय खाद्यान्न का उठाव कैसे?
जाहिर है सारा खेल रजौली एसडीओ ने नियम कानून तोड़ कर किया। डीएम भी इस मामले में चुप्पी साध ली है। अगर यही हाल रहा तो पीडीएस से भ्रष्टाचार समाप्त हो पायेगा क्या? इस प्रकार ऐसा कर अधिकारियों ने पीडीएस विक्रेताओं को स्पष्ट संदेश दिया है ” हम हूं लूटव, तू भी लूट, लूटे के आजादी बाद” तभी तो कहा जा रहा है:- जिले में भ्रष्टाचार का हद है रे भाय? वैसे इसकी शिकायत मुख्य सचिव, खाद्य आपूर्ति सचिव से लेकर डीएम से की गयी है। आगे आगे देखिए होता है क्या?
भईया जी की रिपोर्ट