नवादा : इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर से 24 सितंबर तक मनायी जाएगी। भगवान गणेश की स्थापना 14 सितंबर को सबसे शुभ मुहूर्त में होगी। इस दिन अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अनूठा मेल रहेगा, जो नए कार्यों के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।
गणेश चतुर्थी: -अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के अनूठा मेल में होगी पूजा
इस वर्ष गणेश चतुर्थी अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के अनूठे मेल में मनायी जाएगी। 14 सितंबर से 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होगी और इसका समापन 24 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर होगा। अभिषेक पूजा व श्री गणेश महोत्सव को लेकर अभी से उत्साह दिखने लगा है, साथ ही पूजा समितियों की गतिविधियां बढ़ गयी हैं। अभी से ही भव्य पंडालों का निर्माण कार्य आरम्भ कर दिया गया है। पूजा समितियां अपने-अपने पंडाल को विशिष्ट बनाने को लेकर लगातार बैठकें कर रूपरेखा तैयार करने में जुटी हैं।
14 सितंबर सोमवार को बेहद हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की स्थापना होगी, जिसके बाद मध्याह्न पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक रहेगा। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी पर बेहद दुर्लभ और मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और इसी दिन उनके पुत्र भगवान श्री गणेश की स्थापना का योग बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अनूठा मेल रहेगा, जो नए कार्यों की शुरुआत, व्यवसाय और बौद्धिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न काल यानी दोपहर में हुआ था, इसलिए गणपति स्थापना और पूजन हमेशा दोपहर के समय करना सर्वश्रेष्ठ होता है। 14 सितंबर को भगवान गणेश की स्थापना और मध्याह्न पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक रहेगा। चतुर्थी तिथि 13 सितंबर की शाम से ही शुरू हो जाएगी और 14 सितंबर की दोपहर बाद तक रहेगी।
विधिपूर्वक पूजन का मिलेगा श्रद्धालुओं को लाभ गणेश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त में ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व दिशा या पूर्व दिशा में एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। प्रतिमा स्थापना के बाद षोडशोपचार विधि से पूजन कर आचमन, स्नान और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। गणेश जी को 21 दूर्वा की गांठें, लाल गुड़हल का फूल, सिंदूर, अक्षत और जनेऊ अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही रिद्धि-सिद्धि के दाता को मोदक और मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी की रात चंद्र दर्शन करना वर्जित होता है, क्योंकि इस तिथि को चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक लगने की मान्यता है। ज्योतिषशास्त्र में भगवान गणेश को बुद्धि, ऋद्धि-सिद्धि और सभी विघ्नों के हर्ता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। 14 सितंबर को गणपति स्थापना के बाद 18 सितंबर को पंचमी विसर्जन, 21 सितंबर को महाअष्टमी पूजन और 24 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन भव्य विसर्जन यात्रा के साथ दस दिवसीय उत्सव का समापन होगा।
भईया जी की रिपोर्ट