नवादा : जिले के रजौली प्रखंड चितरकोली गांव में धनार्जय नदी पर पुल नहीं होने के कारण करीब 3,000 की आबादी वाले गांव के ग्रामीणों का जीवन हर दिन खतरे में रहता है। गांव में लगभग 1,700 मतदाता हैं और अधिकांश लोग आजीविका के लिए खेती एवं पशुपालन पर निर्भर हैं। नदी के दूसरी ओर खेत और पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होने के कारण ग्रामीणों को बिना किसी सुरक्षित रास्ते के नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
बिना पुल के ऐसे कटती है ग्रामीणों की जिंदगी
चितरकोली गांव के बगल से गुजरने वाली धनार्जय नदी दोनों ओर से पहाड़ियों से घिरी हुई है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है और पानी का बहाव तेज हो जाता है ऐसे में खेती-किसानी और पशुओं के चारे के लिए नदी के उस पार जाने वाले ग्रामीणों को घंटों जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार जरूरी काम छोड़कर लोगों को वापस घर लौटना पड़ता है।
तेज जल प्रवाह में बहने से वृद्ध की हो चुकी है मौत
बीते गुरुवार को तेज जल प्रवाह में फंसने से गांव निवासी खोशी यादव की मौत हो चुकी है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है। ग्रामीण अनिल यादव ने बताया कि उनके पिता मवेशियों को धो रहे थे इसी दौरान नदी का पानी अचानक बढ़ गया और वे तेज बहाव में बह गये।
बारिश में हादसों का बना रहता है खतरा
ग्रामीण बैजू यादव ने बताया कि आजादी के 75 साल बाद भी गांव के पास धनार्जय नदी पर पुल का निर्माण नहीं हो सका है। बारिश के दिनों में नदी पार करने के दौरान अक्सर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। श्रवण कुमार, पीयूष कुमार, रिशु कुमार, प्रिंस कुमार, गुड्डू कुमार, सुबोध कुमार, सौरभ कुमार सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले हुई वृद्ध की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
अनाज मंडी तक सामान पहुंचाना मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि पुल नहीं होने के कारण अनाज मंडी तक कृषि उत्पाद और पशु पालकों को दूध व अन्य सामान पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। बारिश के दौरान कई बार गांव का संपर्क मुख्य सड़क से कट जाता है। ग्रामीणों को सुबह से शाम तक नदी के जल प्रवाह के कम होने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में रोजमर्रा के काम और आजीविका दोनों प्रभावित होते हैं।
भईया जी की रिपोर्ट