नवादा : जिले में इस वर्ष मानसून की बेरुखी ने किसानों और आम जनजीवन की चिंता बढ़ा दी है। जून और जुलाई के महीनों में जिले में उम्मीद से काफी कम बारिश दर्ज की गई , जिससे सूखे जैसे हालात पैदा होने लगे हैं। जून में नवादा में सामान्य वर्षापात 134.6 मिलीमीटर होना चाहिए था, लेकिन, पूरे महीने में औसतन केवल 67.0 मिमी बारिश ही दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 50% कम है। जुलाई महीने में स्थिति और भी चिंताजनक है। जुलाई का सामान्य वर्षापात जहां 275.7 मिमी निर्धारित है, वहीं मध्य जुलाई यानी 16 तारीख तक जिले में औसतन महज 70.2 मिमी बारिश हो पाई है।
आमतौर पर जून और जुलाई का समय धान की रोपनी और बिचड़ा तैयार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस अवधि में सामान्य तौर पर कुल 410.3 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक दोनों महीनों को मिलाकर मात्र 137.2 मिमी बारिश दर्ज हो सकी है। पानी की इस भारी कमी के कारण जिले के अधिकांश प्रखंडों में खेत सूखे पड़े हैं और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। पानी के अभाव में खरीफ फसलों के उत्पादन पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। 20 फीसदी तक फसलों के उत्पादन पर असर पड़ेने की आशंका से किसान अभी से सहमे हुए हैं।
छका रहा मानसून, किसानों की उम्मीदों पर फिर रहा पानी
आधा आषाढ़ बीतने को है और सावन का महीना सर पर है, लेकिन जिले में मानसून की बेरुखी जारी है। हाल यह है कि मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए बारिश के सारे पूर्वानुमान इस बार पूरी तरह ध्वस्त हो कर रह गए हैं। आसमान में बादलों की आवाजाही छका रही है। शशऐसे मौसम में उमस का प्रकोप झेलना पड़ रहा है।
जिले के किसान इस भीषण उमस भरी गर्मी और सूखे जैसे हालात के बीच हर दिन भगवान इंद्रदेव की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन उनकी उम्मीदों पर लगातार पानी फिरता नजर आ रहा है। नवादा और इसके आस-पास के प्रखंडों में बिचड़े सूखने लगे हैं। सिंचाई के पारंपरिक साधन नहरें और आहर-पाइन खाली पड़े हैं, तो भूजल स्तर लगातार नीचे खिसकने से नलकूप भी समय पर साथ नहीं दे पा रहे हैं। इस बेरुखी का सीधा असर खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपनी पर पड़ रहा है। जिले में धान की रोपनी का लक्ष्य तो दूर, अभी तक रोपे गए बिचड़ों को बचाना भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
अल नीनो के प्रभाव से रूठ गई बारिश
इस वर्ष मानसून के पूरी तरह पटरी से उतरने के पीछे प्रशांत महासागर में सक्रिय भूगोलीय घटना अल नीनो का गंभीर प्रभाव माना जा रहा है। मौसम वैज्ञानिक रौशन कुमार ने बताया कि अल नीनो के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी हवाओं की सामान्य गति और उनकी ताकत में भारी कमी आई है। अल नीनो की स्थिति में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। यह गर्मी वायुमंडलीय परिसंचरण को प्रभावित करती है, जिसके कारण भारत की तरफ आने वाली नमी युक्त दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।
यद्यपि मानसून की शुरुआत सामान्य दिख रही थी, लेकिन जैसे ही यह बिहार की सीमा में बढ़ा, अल नीनो के प्रभाव के चलते बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी वाली पूर्वी हवाएं कमजोर हो गईं। रिणामस्वरूप, दक्षिण बिहार का यह क्षेत्र, जो पहले से ही बारिश के मामले में संवेदनशील माना जाता है, गंभीर सूखे की चपेट में आ गया। अल नीनो के कारण मानसूनी हवाओं में पर्याप्त दबाव क्षेत्र नहीं बन पा रहा है, जिससे बादल तो आते हैं लेकिन बरसने की क्षमता खो देते हैं। इस मौसमी परिघटना की मार सीधे तौर पर जिले के कृषि चक्र पर पड़ी है।
मौसम प्रणाली भी अब तक नहीं दिख रहा अनुकूल
वर्तमान मौसम प्रणाली अनुकूल नहीं दिख रहा है। रौशन कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में एक मानसूनी ट्रफ समुद्र तल पर जम्मू, देहरादून, बाराबंकी, पटना, बांकुरा और कैनिंग से होकर गुजरते हुए दक्षिण-पूर्व की ओर पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी की तरफ बढ़ रही है। इसके साथ ही, उत्तरी बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिसके आने वाले 24 घंटों में कम दबाव के क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम उत्तर प्रदेश और उसके आसपास 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। हालांकि, नवादा सहित दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में इन प्रणालियों का मजबूत असर दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर केवल आंशिक बादल और भारी उमस भरी गर्मी का माहौल बना हुआ है।
जुलाई माह में अब तक वर्षापात (एमएम में)
प्रखंड वर्षापात नवादा 13.9 मेसकौर 31.2 रोह 46.0 हिसुआ 48.2 सिरदला 56.4 गोविन्दपुर 58.2 वारिसलीगंज 62.2 पकरीबरावां 67.2 नरहट 72.6 नारदीगंज 73.2 कौआकोल 90.6 अकबरपुर 96.4 काशीचक 101.4 रजौली 151.8 कुल औसत 70.2 प्रतिशत।
भईया जी की रिपोर्ट