-मजार-ए-मुबारक पर हुई चादरपोशी, देश में अमन-चैन व भाईचारे के लिए मांगी गई दुआएं
नवादा : नगर के ऐतिहासिक भदौनी शरीफ में हर साल की तरह इस बार भी 10 वां सालाना अजीम-उश्शान जलसे का आयोजन बेहद शान-ओ-शौकत और रूहानी माहौल में किया गया। इस मुबारक जलसे (जश्न गौसुलवरा कॉन्फ्रेंस व जश्न सरकार-ए-सुरकाही) की पुरनूर जेरे सरपरस्ती सज्जादानशीं हजरत सूफी आशिम खान हलीमी ने की, वहीं सदारत के फराइज पीरे तरीकत हजरत सूफी शाह मोहम्मद शहूद आलम हलीमी तेगी ने अंजाम दिया। कयादत सूफी शाह मोहम्मद उस्मान हलीमी ने अंजाम दिया।
मौके पर हजारों अकीदतमंदों ने हाजिरी लगाई। जलसे के मुख्य आकर्षण के रूप में हजरत दाता भूलन शहीद के मजार-ए-मुबारक पर पूरी अकीदत और एहतराम के साथ चादरपोशी की गई। इस रूहानी मौके पर देश और समाज में अमन, चैन, आपसी भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष सामूहिक दुआएं मांगी गईं। जलसे में शामिल होने के लिये जिले के अलावा दूर-दराज के इलाकों से हजारों की तादाद में मुहिब्बीन और जायरीन पहुंचे, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय और आध्यात्मिक रंग में सराबोर नजर आया।
उलेमा के बयानात और शोअरा के कलाम से झूमे लोग
रूहानी महफिल को गुलजार करने के लिए देश के कई नामचीन उलेमा-ए-किराम और जाने-माने शोअरा (शायर) शरीक हुए। जलसे में मौलाना सादिक, मुफ़्ती नवेद, मौलाना बहाउद्दीन, मौलाना अमीरुल्लाह और मौलाना मोस्सरफ ने अपनी तकरीरों व बयानों से अकीदतमंदों को रूहानी रोशनी से नवाजा। इसके अलावा मशहूर शायर वकार जमाली, मंजर शाही, गुलाम जिलानी और अकबरपुर से आए मुख्तार वारसी ने अपने बेहतरीन कलाम और नात-ए-पाक पेश कर महफिल में चार चांद लगा दिया, जिसे सुनकर महफ़िल में मौजूद लोग झूम उठे।
लंगर-ए-आम का रहा विशेष इंतजाम
जलसे में दूर-दराज से आए तमाम मेहमानों और अकीदतमंदों की खातिरदारी के लिए इंतजामिया बेरादराने शहूदी कमेटी की तरफ से बड़े पैमाने पर लंगर-खाना का खास प्रबंध किया गया था। हजारों की संख्या में लोगों ने लंगर (प्रसाद) ग्रहण किया। आयोजन के सफल और शांतिपूर्ण संचालन से भदौनी शरीफ और आसपास का पूरा इलाका खुशनुमा और यादगार माहौल बना।
भईया जी की रिपोर्ट
