नवादा : जिले के रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की बेहद गंभीर और जानलेवा लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल में तैनात कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण आम जनता का सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से भरोसा धीरे-धीरे उठता जा रहा है।
बिहार सरकार जहां एक तरफ करोड़ों रुपये खर्च कर सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर रजौली अनुमंडलीय अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी अपनी कर्तव्यहीनता और लापरवाह रवैये से सरकार और वरीय पदाधिकारियों के निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ताजा मामले में एक बीमार महिला मरीज को एक्सपायर (समय सीमा पार) दवा दे दी गई और जब इसकी शिकायत की गई, तो उसे बिना दवा दिए ही अस्पताल से बैरंग लौटा दिया गया।
डॉक्टर ने लिखी ब्रमोहेक्सिन, फार्मासिस्ट ने थमा दी दो महीने पहले एक्सपायर हुई सिरप
जानकारी के अनुसार नगर पंचायत क्षेत्र के महसय निवासी अरुण सिंह की बीमार पत्नी राधा देवी अपने पुत्र रोहित सिंह के साथ इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल पहुंची थीं. ओपीडी (OPD) में बाकायदा रजिस्ट्रेशन कराने तथा ब्लड प्रेशर (BP) व शुगर की जांच कराने के बाद उन्होंने ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. श्यामनंदन प्रसाद से परामर्श लिया।
डॉ. श्यामनंदन ने मरीज की तकलीफ सुनने के बाद पर्ची पर जरूरी दवाइयां लिख दीं। इसके बाद जब मरीज का बेटा दवा काउंटर पर गया, तो वहां तैनात फार्मासिस्ट ने पर्ची पर लिखी मुख्य दवा के बदले दो महीने पूर्व एक्सपायर हो चुकी ‘डाईएथिल बेमाजीन साइट्रेट सिरप’ (कफ सिरप) हाथ में थमा दी। शिकायत करने पर फार्मासिस्ट ने डॉक्टर की लिखी दवा का नाम ही काट दिया।
बिना दवा घर लौटे पीड़ित
खांसी और कफ से पीड़ित राधा देवी के बेटे रोहित सिंह ने जब काउंटर पर ही सिरप की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट देखी, तो वह दंग रह गया। सिरप दो महीने पहले ही एक्सपायर हो चुकी थी। रोहित ने जब इसकी शिकायत फार्मासिस्ट से की, तो फार्मासिस्ट अपनी गलती सुधारने के बजाय भड़क गया। उसने एक्सपायर सिरप वापस ले ली और डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी मूल दवा ‘ब्रमोहेक्सिन हाइड्रोक्लोराइड’ का नाम ही पेन से काट दिया। फार्मासिस्ट ने दो टूक कह दिया कि यह दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि काउंटर कर्मी ने पहले गलत और एक्सपायर्ड दवा दी और विरोध करने पर बदतमीजी करते हुए बिना कोई दवा दिए उन्हें अस्पताल से भगा दिया।
अस्पताल प्रबंधन ने डांट-फटकार लगाकर रफा-दफा किया मामला, रोगी कल्याण समिति निष्क्रिय
इस गंभीर प्रकरण को लेकर जब अस्पताल प्रभारी डीएस (डिप्टी सुपरिटेंडेंट) डॉ. दिलीप कुमार से बात की गई, तो उनका जवाब भी खानापूर्ति वाला ही रहा। उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित फार्मासिस्ट को बुलाकर कड़ी डांट-फटकार लगाई। फार्मासिस्ट ने सफाई दी है कि गलती से वह दवा मरीज के पास चली गई थी।
अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह कि जब डॉक्टर ने पर्ची पर दूसरी दवा का नाम लिखा , तो उसके बदले दूसरी दवा क्यों निकाली गई ? वह भी एक्सपायर दवा वितरण कक्ष में क्या कर रही थी? क्या अस्पताल में दवाओं के स्टॉक और एक्सपायरी की नियमित जांच नहीं होती? प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि रजौली अस्पताल में मरीजों के साथ होने वाले इस दुर्व्यवहार और अव्यवस्था का मुख्य कारण ‘रोगी कल्याण समिति’ का पूरी तरह निष्क्रिय होना है। फिलहाल, घटना से आहत पीड़ित महिला के परिजनों ने सरकारी तंत्र से भरोसा तोड़ लिया है और वे बाजार के एक प्राइवेट प्रैक्टिशनर से मोटी रकम खर्च कर अपनी मां का इलाज कराने को मजबूर हैं।
भईया जी की रिपोर्ट