नवादा : 14 अप्रैल को सूर्य के राशि परिवर्तन के बाद खरमास का समापन हो जाएगा। खरमास की अवधि समाप्त होने के साथ ही एक बार फिर से शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। 14 मार्च से खरमास शुरू होने के बाद से मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से विराम लग गया था। ऐसे में विवाह, मुंडन, उपनयन, कर्णछेदन आदि संस्कारों के मुर्हूत नहीं बन रहे थे। लेकिन, अब 14 अप्रैल की सुबह 11:45 बजे सूर्य मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास का समापन हो जाएगा। हालांकि, वैवाहिक मुहूर्त 20 अप्रैल से शुरू होगा। अप्रैल और मई माह में विवाह के लिए 8-8 शुभ मुहूर्त हैं। 17 मई से 15 जून तक अधिकमास होने के कारण मांगलिक कार्य पर विराम रहेगा। उसके बाद 19 जून से फिर से वैवाहिक मुहूर्त शुरू होगा। जून में नौ और जुलाई माह में पांच शुभ मुहूर्त रहेंगे।
बाजारों में बढ़ी रौनक, दुकानदारों को उम्मीद
खरमास के दौरान बाजारों में अपेक्षाकृत सुस्ती देखी जा रही थी, लेकिन अब दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है। कपड़ा, गहना, बर्तन, फर्नीचर और सजावटी सामान की दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। व्यापारियों का कहना है कि 20 अप्रैल के बाद से विवाह सीजन जोर पकड़ लेगा, जिससे कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है। वहीं टेंट, बैंड बाजा, कैटरर, हलवाई और खाना बनाने वाले कारीगरों को कारोबार शुरू होने की उम्मीद प्रबल है।
शुभ कार्यों को लेकर परिवारों में बढ़ी हलचल
सूर्य का मेष राशि में प्रवेश अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे नववर्ष के प्रारंभ के रूप में भी देखा जाता है। इसके बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इधर, जिन परिवारों में पहले से विवाह तय हैं, वहां तैयारियां तेज हो गई हैं। शादी के कार्ड बांटे जा रहे हैं, रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजा जा रहा है और घरों में सजावट का काम शुरू हो गया है। महिलाएं खरीदारी में जुटी हैं, वहीं पुरुष आयोजन की व्यवस्था में लगे हैं।
14 अप्रैल को होगा सतुआनी पर्व
इस बार 14 अप्रैल का दिन विशेष महत्व वाला है। इसी दिन खरमास समाप्त होने के साथ-साथ सतुआनी का पर्व भी मनाया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में सतुआनी को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इस दिन लोग सत्तू, गुड़ और आम के पत्तों से पूजा-अर्चना कर नए सत्र की शुरुआत करते हैं।
ककोलत जलप्रपात स्नान का है महत्व
धार्मिक मान्यता है कि 14 अप्रैल को ककोलत जलप्रपात स्नान करने से सर्प व गिरगिट योनि से मुक्ति मिलती है। ककोलत जलप्रपात स्नान की तैयारियां आरंभ हो गयी है। जनवरी माह में खरमास के समापन के दिन लोग दही-चूड़ा और गुड़ भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। वहीं चैत्र मास के खरमास के समापन होने पर नए सत्र की शुरुआत नए अनाज यानी सतुआ, आम के टिकोले के चटनी आदि ग्रहण कर करते हैं। इसको लेकर खास कर किसान परिवारों में विशेष उत्साह रहता है, जो अभी से ही देखा जा रहा है। पर्व की तैयारियों में सभी अपने स्तर से जुट गए हैं। विवाह के शुभ मुहूर्त: माह शुभ मुहूर्त अप्रैल 2026 20, 21, 23, 25, 26, 28, 29 एवं 30 मई 2026 19, 21, 22, 24, 25, 27, 29 एवं 30 जून 2026 01, 03, 05, 06, 07, 11, 12 एवं 14 जुलाई 2026 01, 05, 06, 07 एवं 11:
भईया जी की रिपोर्ट