नवादा : “हर डाल पर उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्तां क्या होगा? कुछ इसी प्रकार की स्थिति पीएमओ कार्यालय की है। शिकायत की जांच के बजाय आरोपी के पास भेज दी जा रही है। ऐसे में कार्रवाई होगा क्या खाक? ताज़ा मामला मनरेगा लोकपाल कार्यालय का है। जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल ने मनरेगा लोकपाल कार्यालय की डीएम द्वारा उपेक्षा से संबंधित शिकायत पीएओ पोर्टल पर दर्ज कर मामले की जांच के साथ कार्रवाई का अनुरोध किया था। पीएमओ कार्यालय द्वारा जांच करने के बजाय उसे जिला लोकशिकायत निवारण कार्यालय को अग्रसारित कर दिया।
चूंकि मामला डीएम के विरुद्ध था फलत: ज़िला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने बगैर जांच मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे निरस्त कर दिया। अब सबसे बड़ा सवाल डीएम के विरुद्ध लोकशिकायत निवारण पदाधिकारी कार्रवाई करने में सक्षम है क्या? अगर नहीं तो फिर पीएमओ कार्यालय द्वारा उसे भेजे जाने का औचित्य ही क्या? फिर पीएमओ कार्यालय की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं।
भईया जी की रिपोर्ट