नवादा : जिला अधिवक्ता तदर्थ कमिटी द्वारा नियुक्त चुनाव पदाधिकारी के मनोनयन पर उंगली उठनी शुरू हो गयी है। अधिवक्ताओं ने इसे नियम विरुद्ध करार देते हुए राज्य अधिवक्ता संघ से हस्तक्षेप की मांग की है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि नियमानुसार निरंजन कुमार सिंह मुख्य चुनाव आयोग बन ही नहीं सकते हैं। सर्वप्रथम इन्होंने जिला अधिवक्ता संघ से अलग होकर अनुमंडल एडवोकेट एसोसिएशन का गठन किया। उनके हस्ताक्षर के साथ लगभग 50 अधिवक्ताओं का हस्ताक्षर था। इसके पूर्व उन्होंने जिला अधिवक्ता संघ से इस्तीफा दिया था।
अनुमंडल एडवोकेट एसोसिएशन के दो बार महासचिव के पद पर काबिज हुए। जिसका एक कॉपी बिहार राज्य अधिवक्ता संघ के चुनाव समिति के पास भी रिकॉर्ड के तौर पर भेजा जाता है। निरंजन कुमार सिंह जिला अधिवक्ता संघ के सदस्य के रूप में सम्मिलित होने के पहले बिहार राज्य अधिवक्ता संघ से अपना अनापत्ति प्रमाण पत्र तक नहीं लिया। ऐसे में निश्चित रूप से जिला अधिवक्ता संघ को अपना अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया। फिर उन्हें जिला अधिवक्ता संघ में शामिल नहीं किया जा सकता। अधिवक्ताओं का का मानना है कि अगर शामिल भी हुये तो उनकी सदस्यता नियमानुसार सही नहीं है और ना ही जिलाअधिवक्ता संघ के सदस्य हो सकते हैं ?
तदर्थ कमिटी के सचिव व अध्यक्ष को निरंजन कुमार सिंह का अनापत्ति प्रमाण पत्र बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं के समक्ष रखना चाहिए था। लेकिन ऐसा न कर मनमानी का परिचय देते हुए चुनाव पदाधिकारी नियुक्त कर दिया। अधिवक्ताओं ने कहा है कि विशेष बैठक बुलाकर अनापत्ति प्रमाणपत्र पत्र सामने दिखा दे, ऐसा नहीं किया तो चुनाव पदाधिकारी बनाने का कोई अधिकार नहीं है। बिहार राज्य अधिवक्ता संघ के चुनाव समिति के समक्ष अधिवक्ताओं ने चुनाव पदाधिकारी की नियुक्ति को चुनौती पेश करने का निर्णय लिया है।
भईया जी की रिपोर्ट