नवादा : पूर्व श्रम राज्यमंत्री राजबल्लभ प्रसाद की शिकायत पर नवादा नगर परिषद अंतर्गत केंदुआ ग्राम स्थित धर्मशीला देवी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित जांच टीम नवादा पहुंची। टीम के सदस्यों ने मुख्य गेट बंद कर दिया और मीडिया समेत किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने नहीं दिया। पिछले दिनों राजबल्लभ प्रसाद के छोटे सुपुत्र अखिलेश कुमार अपने आवास के पास ही थार वाहन के एक पेड़ से टकरा जाने के कारण दुर्घटना ग्रस्त हो गये थे।
आनन फानन में उन्हें नजदीकी अस्पताल धर्मशिला देवी मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल लाया गया जहां गंभीर अंदरूनी चोट की आशंका होने के बावजूद सात घंटे बिना समुचित इलाज के रोक कर रखा गया। स्थिति बिगड़ने पर मरीज को पटना रेफर कर दिया गया किंतु तबतक काफी देर हो चुकी थी और पटना ले जाने के क्रम में ही अखिलेश कुमार की मौत हो गई। राजबल्लभ प्रसाद ने इस संबंध में मुफस्सिल थाना को आवेदन देकर आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही एवं बदनीयती के कारण ही मेरे बेटे की मौत हुई है इसलिए अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर उसके संचालक के विरुद्ध न्यायोचित कार्रवाई की जाय।
आवेदन का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक जांच कमिटी गठित की गई और 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया परंतु जांच टीम हॉस्पिटल के अंदर पहुंच कर बाहर से गेट बंद करवा दिया और किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। जांच टीम के इस व्यवहार से गेट पर जुटे अखिलेश कुमार के समर्थकों में काफी आक्रोश देखा गया। उपस्थित लोगों ने बताया कि जांच टीम द्वारा जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई क्योंकि पीड़ित पक्ष को इसकी सूचना तक नहीं दी गई। यहां तक मीडिया वालों को भी बाहर रोककर रखा गया।
मौके पर राजबल्लभ प्रसाद के समर्थकों समेत पूर्व में इस अस्पताल के कारनामों से अपने परिजन खो चुके लोगों की भीड़ लग गई और अस्पताल प्रबंधन समेत जांच टीम के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त किया। लगभग दो घंटे के बाद टीम के सदस्य बाहर आए और अखिलेश कुमार का इलाज करने वाले डॉक्टर की अनुपस्थिति का बहाना बनाने लगे। आक्रोशित जनता मांग कर रही थी कि हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर मालिक और प्रबंधन के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाय। जांच टीम ने बताया कि अस्पताल का सीसी टीवी फुटेज और अखिलेश के इलाज से संबंधित सारे कागजात प्रस्तुत करने का निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दिया गया है।
आक्रोशित जनता ने ऐसी जांच से असहमति प्रकट करते हुए कहा कि धर्मशिला देवी अस्पताल कब्रगाह के रूप में परिवर्तित हो गया है क्योंकि बेहतर इलाज के नाम पर यहां अभिभावकों का शोषण दोहन किया जाता है और पैसे के लोभ में मरीजों को मौत के दरवाजे तक पहुंचा दिया जाता है। यहां न तो कोई विशेषज्ञ डॉक्टर है न कोई जांच का इंस्ट्रूमेंट। यहां तक कि जीवन रक्षक प्रणाली युक्त एंबुलेंस भी यहां नहीं है फिर भी गंभीर मरीजों को रोक लिया जाता है। लोगों ने सरकार एवं प्रशासन से मांग की है कि मामले की गहन जांच हेतु उच्चस्तरीय कमिटी का गठन किया जाय और इसके पूर्व अस्पताल में ताला जड़ दिया जाय ताकि भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
भईया जी की रिपोर्ट