नवादा : अपना आशियाना बनाना हर व्यक्ति का एक जीवनभर का सपना होता है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध की तपिश ने इस सपने की नींव हिला दी है। पिछले 15 दिनों में जिस तेजी से निर्माण सामग्री की कीमतों में उछाल आया है, उसने मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। युद्ध के कारण बिगड़ी सप्लाई चेन और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर सरिया, सीमेंट और रेत-गिट्टी पर दिख रहा है। इस परिस्थिति में मध्यम वर्ग के लोगों ने फिलहाल निर्माण कार्य को स्थगित कर दिया है, जबकि जिन्हें बेहद जरूरी है, वह संकट झेलते हुए भी निर्माण कार्य में जुटे हैं। बस, ऐसे लोग यह दुआ करते मिल रहे हैं कि युद्ध विराम हो ताकि उनके सपनों का महल उनके बजट में ही पूर्ण हो सके।
सामान्य रूप से 10 से 15 प्रतिशत की हुई वृद्धि :- युद्ध शुरू होने से पहले बाजार में एक स्थिरता थी, लेकिन लगभग एक पखवारे के भीतर परिदृश्य पूरी तरह बदल गया । सबसे अधिक मार सरिया यानी छड़ पर पड़ी है, जिसकी कीमतों में लगभग 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी जा रही है। सीमेंट, जो निर्माण का मुख्य आधार है, उसकी प्रति बोरी कीमत में भी भारी इजाफा हुआ है। ब्रांड के हिसाब से इसमें 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।
गिट्टी, बालू, बाइंडिंग वायर और पीवीसी पाइप आदि की कीमतों में भी करीब-करीब 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस प्रकार, युद्ध ने केवल सीमाओं को ही नहीं, बल्कि आम आदमी की जेब को भी प्रभावित किया है। तमाम सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि के साथ ही ईंधन की कीमतों में वृद्धि ने ढुलाई महंगी कर दी है, जिससे ईंट, रेत और गिट्टी जैसी स्थानीय सामग्री भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक अपना घर बनाने का सपना देखने वालों के लिए यह तपिश झेलनी ही होगी। बजट पर कुल असर ,सपनों का घर हुआ महंगा :- बाजार के विशेषज्ञ चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रवि गुप्ता ने बताया कि एकाएक महंगाई दर में भारी वृद्धि के बाद यदि हम औसत रूप से देखें, तो एक मध्यम आकार के यानी 1000 वर्ग फुट मकान के निर्माण की लागत में पिछले एक महीने में भारी इजाफा हुआ है। कुल निर्माण लागत में वृद्धि की बात की जाए तो सिर्फ निर्माण सामग्रियों की कीमतों में औसतन 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इस प्रकार, मकान बनवा रहे लोगों को अतिरिक्त भार झेलने की नौबत आ गयी है। यदि कोई व्यक्ति पहले 20 लाख रुपये में घर बनाने की योजना बना रहा था, तो अब उसे उसी घर के लिए 03 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
भवन निर्माण सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि का आंकड़ा: -सामग्री युद्ध से पहले (रुपये प्रति इकाई) वर्तमान कीमत (रुपये प्रति इकाई) बढ़ोतरी (%) सरिया (टीएमटी छड़) 62,000/टन 71,300/टन 15 सीमेंट (ब्रांडेड) 340/बोरी 391/बोरी 15 गिट्टी (क्रेशर) 6,500/100 सीएफटी 7,500/100 सीएफटी 15 बालू (रेत) 3000/100 सीएफटी 36,00/100 सीएफटी 20 बाइंडिंग तार 70/किग्रा 85/किग्रा 20 पीवीसी पाइप 220/पीस 260/पीस 18
आम लोगों व दुकानदारों की व्यथा: -1.मैंने सोचा था कि रिटायरमेंट के पैसों से छोटा सा घर बना लूंगा। महीने भर पहले काम शुरू किया, तब सरिया 62 रुपये किलो था, आज 70 रुपये मांग रहे हैं। मेरा अनुमानित बजट 15 लाख था, जो अब बढ़कर 17 लाख के भी पार कर रहा है। समझ नहीं आ रहा कि काम जारी रखूं या आधे में ही रोक दूं। – मनोज कुमार, काशीचक, नवादा। 2.होम लोन लेकर निर्माण शुरू किया था, लेकिन बैंक ने तो पुरानी कीमतों पर लोन पास किया है। अब सीमेंट और ईंटों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि मुझे फिनिशिंग का काम टालना पड़ेगा।
युद्ध देश से बाहर कहीं और हो रहा है, लेकिन उसकी आंच निराशाजनक रूप से हमारे सपनों के घर तक पहुंच गई है। – राहुल कुमार, मंझवे, नवादा। 3.कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सभी सामग्रियों के दाम सीधे प्रभावित हुए हैं। ट्रांसपोर्टेशन खर्च 15-20 प्रतिशत तक बढ़ गया है। ग्राहक पहले से बुक किए हुए माल पर पुरानी कीमत मांगते हैं, जिससे घाटा उठाने की नौबत बन जा रही है। बाजार में भारी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। -रवि गुप्ता, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज।
3.इन दिनों दुकान पर सन्नाटा है। लोग रेट पूछकर चले जाते हैं। पीछे से कंपनियों ने सप्लाई कम कर दी है और रेट हर दूसरे दिन बढ़ रहे हैं। सरिया और तार के दाम तो शेयर मार्केट की तरह ऊपर जा रहे हैं। हमें भी माल महंगा मिल रहा है, जिससे बिक्री पर 40 प्रतिशत तक का गिरावट देखा जा रहा है। -अरविंद कुमार, भवन निर्माण सामग्री विक्रेता।
भईया जी की रिपोर्ट