नवादा : जिले के अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र के पिरौटा गांव आये जापानी मेहमानों के लिए होली कार्यक्रम के दूसरे चरण में उन्होंने बिहार की पारंपरिक ‘कदो-किनहोली’ (कीचड़ की होली) का जमकर आनंद लिया। कायो वाकाटाबे और ताकेरु ने पारंपरिक तरीके से मिट्टी और पानी के मिश्रण के साथ होली खेली, जो प्रकृति और मनुष्य के गहरे संबंध को दर्शाता है। एडवोकेट रंजन कुमार ने मेहमानों को बताया कि यह परंपरा ‘बुराई पर अच्छाई’ की जीत और अहंकार को मिटाकर ज़मीन से जुड़ने का प्रतीक है।
विदेशी मेहमानों की प्रतिक्रिया
मास्टर शेफ असामी ने इसे “एक अनूठा और ऑर्गेनिक स्किन केयर उत्सव” (Organic Skin Care Celebration) बताते हुए खूब ठहाके लगाए।
रूरल टूरिज्म के मॉडल में ‘कदो-किनहोली’ का महत्व
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की मिट्टी से जुड़ी परंपराएं वैश्विक पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती हैं। पर्यटक अब सिर्फ होटल में नहीं रुकना चाहते, वे स्थानीय संस्कृति और ‘कदो-किनहोली’ जैसी पुरानी रस्मों को जीना चाहते हैं।रसायनों वाले रंगों की जगह शुद्ध मिट्टी और फूलों के रंगों का उपयोग ‘इको-टूरिज्म’ को बढ़ावा देता है।जब जापानी सितारे कीचड़ में सने ग्रामीणों के साथ गले मिले, तो भाषा की दीवारें टूट गईं और सिर्फ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भाव नज़र आया।
भईया जी की रिपोर्ट