– बच्चों को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया की दी जानकारी
नवादा : नालसा एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार तथा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के मार्गदर्शन में दिनांक 08 फरवरी 2026 को कौआकोल प्रखंड के केवाली ग्राम पंचायत स्थित सामुदायिक भवन में बच्चों के दत्तक ग्रहण प्रक्रियाओं पर आधारित विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साजिद अयुब ख़ान, डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल, नवादा ने बताया कि दत्तक ग्रहण (Adoption) एक विधिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से कोई दंपत्ति या व्यक्ति किसी अन्य बच्चे को अपनी वैधानिक संतान के रूप में स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया मुख्यतः किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत संचालित होती है, जिसका उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित एवं स्थायी पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
उन्होंने जानकारी दी कि दत्तक ग्रहण के लिए दत्तक लेने वाला भारतीय नागरिक, अनिवासी भारतीय अथवा विदेशी नागरिक हो सकता है। अविवाहित, विवाहित, विधवा या तलाकशुदा व्यक्ति भी दत्तक ले सकता है। दत्तक लेने वाले की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए तथा वह मानसिक एवं शारीरिक रूप से सक्षम होना चाहिए। इच्छुक दत्तक माता-पिता को Central Adoption Resource Authority (CARA) की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना आवश्यक होता है।
उन्होंने बताया कि पंजीकरण के उपरांत अधिकृत सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दत्तक लेने वाले परिवार की पारिवारिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति का मूल्यांकन कर होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके बाद दत्तक माता-पिता की पात्रता एवं वरीयता के आधार पर बच्चे का मिलान किया जाता है तथा न्यायालय से आदेश प्राप्त होने से पूर्व बच्चे को अस्थायी रूप से पालन-पोषण हेतु परिवार को सौंपा जाता है। डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल ने बताया कि दत्तक ग्रहण की अंतिम स्वीकृति के लिए न्यायालय में याचिका दायर की जाती है। न्यायालय द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेजों एवं रिपोर्टों की समीक्षा के उपरांत दत्तक आदेश पारित किया जाता है।
दत्तक ग्रहण के पश्चात छह माह से दो वर्षों तक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा नियमित अनुवर्ती निरीक्षण किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे का समुचित विकास हो रहा है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने बताया कि दत्तक ग्रहण न केवल एक संवेदनशील प्रक्रिया है, बल्कि यह एक बच्चे को सुरक्षित, स्थायी एवं प्रेमपूर्ण परिवार प्रदान करने का प्रभावी माध्यम भी है। यह प्रक्रिया पूर्णतः विधिसम्मत है तथा इसका उद्देश्य बच्चे के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।
उन्होंने उपस्थित लोगों को जानकारी दी कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर 90 दिवसीय Mediation 2.0 अभियान की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य आम लोगों को मध्यस्थता के माध्यम से सरल, सुलभ एवं शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना है। यह अभियान न्यायालय की जटिल प्रक्रियाओं के स्थान पर संवाद एवं सहमति आधारित समाधान को प्राथमिकता देता है, जिसमें पक्षकार ऑनलाइन, ऑफलाइन एवं हाइब्रिड मोड में उपस्थित होकर अपने मामलों का निपटारा करा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यह अभियान उन मामलों को कवर करता है, जिनमें समझौते की संभावना अधिक होती है। इनमें पारिवारिक वाद, क्लेम वाद, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, उपभोक्ता विवाद, सुलहनीय आपराधिक मामले, बंटवारा वाद, मकान मालिक एवं किरायेदार विवाद, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले आदि शामिल हैं। ऐसे मामलों की पहचान कर पक्षकारों को नोटिस तामिला कराई जाएगी तथा तत्पश्चात मध्यस्थ अधिवक्ताओं द्वारा आपसी संवाद के माध्यम से मामलों का निपटारा कराया जाएगा। इस अवसर पर साजिद अयुब ख़ान, डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल के साथ केवाली पंचायत के प्रतिनिधि, अन्य गणमान्य व्यक्ति, बच्चे तथा पारा विधिक स्वयंसेवक श्री रामानुज कुमार उपस्थित थे।
भईया जी की रिपोर्ट