– ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मिलेगी अकादमिक स्वायत्तता
नवादा : जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि आजादी के बाद से उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा कन्हाई लाल साहू महाविद्यालय (केएलएस कॉलेज) अब प्रदेश में ‘इंस्टीट्यूट ऑफ इंपोर्टेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। बिहार सरकार द्वारा सूचना में केएलएस कॉलेज को शामिल किया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मिलेगा स्वायत्त दर्जा
राज्य सरकार की इस पहल के तहत केएलएस कॉलेज को राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रावधानों का अनुपालन करते हुए स्वायत्तता (सेल्फ गवर्नेंस) प्रदान की जाएगी। इससे कॉलेज को अकादमिक निर्णय लेने, पाठ्यक्रम विकास और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। उद्देश्य कॉलेज को शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करना है।
दो चरणों में होगा 55 संस्थानों का विकास
उच्च शिक्षा परिषद द्वारा जारी सूची में राज्य के कुल 55 उच्च शिक्षण संस्थानों को ‘इंस्टीट्यूट ऑफ इंपोर्टेंस’ के रूप में विकसित करने की योजना है। यह कार्य दो चरणों में होगा। पहले चरण में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान पटना विश्वविद्यालय का साइंस कॉलेज, पटना कॉलेज, मगध महिला कॉलेज सहित 31 संस्थानों का विकास किया जाएगा। दूसरे चरण में वर्ष 2027-28 के तहत नवादा का केएलएस कॉलेज समेत 24 संस्थानों को यह दर्जा मिलेगा।
शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाओं में होगा व्यापक विस्तार
इंस्टीट्यूट ऑफ इंपोर्टेंस बनने के बाद केएलएस कॉलेज में शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा। आधुनिक प्रयोगशालाएं, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और शोध से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और समकालीन शिक्षा मिल सके।
1957 में रखी गई थी कॉलेज की आधारशिला
दानवीर और शिक्षाप्रेमी कन्हाई लाल साहू ने वर्ष 1957 में महाविद्यालय की आधारशिला रखी थी। स्थापना से 1966 तक कॉलेज उनके निजी आवास में संचालित होता रहा। वर्ष 1972 में उनकी पत्नी मुन्नी देवी द्वारा वर्तमान स्थल पर भूमि दान किए जाने के बाद कॉलेज को स्थायी स्वरूप मिला। कला और मानविकी विषयों की पढ़ाई 1958 से शुरू हुई, जबकि 1981-82 से विज्ञान और 1986-88 से वाणिज्य विषयों की पढ़ाई आरंभ हुई।
मगध विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई के रूप में पहचान
केएलएस कॉलेज वर्ष 1978 में मगध विश्वविद्यालय से संबद्ध हुआ और 1983 से अंगीभूत इकाई के रूप में शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया। वर्तमान में यहां कला, मानविकी, विज्ञान, वाणिज्य के साथ-साथ कई व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
70 वर्षों बाद नई पहचान की ओर कदम
1957 में स्थापित केएलएस कॉलेज लगभग 70 वर्षों बाद ‘इंस्टीट्यूट ऑफ इंपोर्टेंस’ बनने की दिशा में अग्रसर है। यह न केवल जिले बल्कि पूरे मगध क्षेत्र के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।
छात्रों को मिलेगा डिजिटल युग का लाभ
कॉलेज के प्राचार्य शैलज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार की इस योजना से कॉलेज में आईटी सेंटर और रिसर्च सेंटर विकसित किए जाएंगे। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ उठा सकेंगे। कंप्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट क्लास और स्मार्ट ऑफिस जैसी सुविधाओं से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक में दक्ष बनाया जाएगा।
भईया जी की रिपोर्ट