– जिले के किसान बोले -‘आत्मा योजना ‘, हम तक क्यों नहीं पहुंचती
नवादा : बिहार सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और आधुनिक खेती से किसानों को जोड़ने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। अगर बात करें जिले की तो यहां कृषि विभाग की अहम योजना आत्मा (ATMA) से जुड़ी जानकारी किसानों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही है। यही वजह है कि अक्सर हर महीने होने वाले प्रशिक्षण और परिभ्रमण कार्यक्रमों के बावजूद बड़ी संख्या में किसान इससे अनजान बने हुए हैं।
किसान सरकार की योजना की तारीफ तो करते हैं, पर मन में एक कसक रह जाता है कि मुझ तक योजना आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रही है? ये बात अलग है कि सरकार लाखों की धनराशि खर्च कर जिले में सरकारी पोस्टर से योजनाओं की जानकारी देने का दावा करती है। अब आइए जिले में आत्मा से जुड़े किसानों से फरवरी के प्लान को समझते हैं।
यहां समझिए किसानों की बातों को
किसान अनंत कुमार सिंह का कहना है कि सरकार की आत्मा से जुड़ी योजना अच्छी लगती है, लेकिन किसान को इसकी सूचना समय पर नहीं मिलती। उन्होंने बताया कि आत्मा से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी किसानों तक पहुंच ही नहीं पाती है। अगर सही समय पर और सही माध्यम से सूचना मिले तो किसान जरूर जुड़ेंगे और इसका लाभ भी उठाएंगे।
किसान संतोष कुमार का कहना है कि सरकार का प्रयास सराहनीय है, लेकिन जानकारी के अभाव में किसान योजनाओं से दूर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक आम किसानों तक योजना की पूरी जानकारी नहीं पहुंचेगी तब तक आत्मा जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य अधूरा ही रहेगा।
आइये समझते हैं किसानों का खास प्लान
जिला कृषि पदाधिकारी आत्मा के सह परियोजना निदेशक अजीत प्रकाश ने कहा कि किसानों के लिए फरवरी महीने में विशेष प्रशिक्षण और परिभ्रमण कार्यक्रम तय किए गए हैं। इसके तहत किसानों को राज्य के अंदर और राज्य के बाहर ले जाकर आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि उन्नत बीज तकनीक के लिए किसानों को उत्तर प्रदेश ले जाने की योजना है। इसके अलावा बकरी पालन से जुड़े प्रशिक्षण के लिए किसानों को मथुरा स्थित बकरी अनुसंधान संस्थान भेजा जाएगा।
इतना ही नहीं, दूध उत्पादन और उसके प्रसंस्करण से जुड़े प्रशिक्षण के लिए किसानों को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड ले जाया जाएगा। बागवानी प्रबंधन के लिए लखनऊ. जबकि जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को सिक्किम स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण और जैविक खेती से जुड़े अन्य प्रशिक्षण भी प्रस्तावित हैं।
कैसे करें आवेदन
कृषि विभाग के अनुसार इन सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए किसान फरवरी महीने के दूसरे सप्ताह तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए किसानों को अपने नजदीकी प्रखंड कृषि कार्यालय या फिर जिला कृषि विभाग में जाकर सूचना देने होगें। इसके बाद विभाग अपने रजिस्टर लिस्ट में किसानों की जानकारी व फोन नंबर रखेगी। इसके बाद विभाग लिमिट के हिसाब से पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर ट्रेनिंग उपलब्ध करवाएगी।
बता दें कि आत्मा योजना के तहत यह प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क होगा और इसका उद्देश्य किसानों को नई तकनीक, बेहतर उत्पादन और वैकल्पिक आय के साधनों से जोड़ना है। सवाल यही है कि जब तक योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक नहीं पहुंचेगी, तब तक किसान इन अवसरों का पूरा लाभ कैसे उठा पाएंगे।
भईया जी की रिपोर्ट