नवादा : जिले के हसनचक गांव में बोरसी के धुएं से कौशल्या देवी और नीतू देवी बेहोश हो गईं। बेहोश महिलाओं की पहचान कौशल्या देवी और उनकी बहू नीतू देवी के रूप में हुई है।बताया जा रहा है कि कड़ाके की ठंड से बचने के लिए दोनों ने रात में कमरे के अंदर बोरसी जलाई और वहीं सो गईं।
बंद कमरे में ऑक्सीजन की कमी और धुएं के कारण दोनों को सांस लेने में परेशानी हुई और वे बेहोश हो गईं। सुबह परिजनों को जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं दिखी, तो दरवाजा खोलने पर दोनों को अचेत अवस्था में पाया गया। घटना ने इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि नवादा में एक दिन पहले ही बोरसी के धुएं से दम घुटने के कारण नाना- नाती की मौत हो चुकी है।
लगातार हो रही घटनाओं से साफ है कि ठंड के मौसम में अलाव और बोरसी का गलत तरीके से इस्तेमाल लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि बंद कमरे में अलाव या बोरसी जलाना बेहद खतरनाक है। इससे ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस जमा हो जाती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। बावजूद लोग ठंड से बचने के लिए लापरवाही बरत रहे हैं।
प्रशासन ने लोगों से की अपील
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों में ठंड बढ़ते ही इस तरह की घटनाएं सामने आने लगती हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग सबक नहीं ले पा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अलाव या बोरसी जलाते समय पर्याप्त वेंटिलेशन रखें, सोते समय आग बुझा दें और बंद कमरे में कभी भी बोरसी जलाकर न सोएं। जिले में लगातार हो रहे हादसे यह चेतावनी दे रहे हैं कि थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। ठंड से बचाव जरूरी है, लेकिन सुरक्षा और सावधानी उससे भी ज्यादा जरूरी है।
भईया जी की रिपोर्ट