पटना/नई दिल्ली : राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा सहायक प्रजनन तकनीक (ART), आईवीएफ (IVF) क्लीनिकों तथा महिलाओं के प्रजनन अधिकारों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों के अध्ययन के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय महिला आयोग के मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक में विशेषज्ञ समिति की अध्यक्ष एवं दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति आशा मेनन सहित समिति के सभी सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान सूचित सहमति (Informed Consent), पारदर्शिता, जैविक अनुरेखण (Biological Traceability), गोपनीयता, शिकायत निवारण तथा जवाबदेही से जुड़े सुरक्षा उपायों को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही ART क्षेत्र में उभरती चुनौतियों तथा कथित अनियमितताओं पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया गया।
समिति महिलाओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नीतिगत, विधिक एवं प्रक्रियागत सुधारों संबंधी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी। साथ ही ART एवं IVF केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) का सुझाव भी देगी, ताकि नैतिक उपचार पद्धतियों को बढ़ावा मिले, चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में एकरूपता आए तथा पूरे क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस अवसर पर कहा कि प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का आधार महिलाओं की गरिमा, उनकी स्वतंत्र पसंद, पारदर्शिता और जवाबदेही होना चाहिए। ART सेवाओं का लाभ लेने वाली प्रत्येक महिला को सुरक्षित, नैतिक एवं सम्मानजनक उपचार के साथ-साथ उसके अधिकारों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
विशेषज्ञ समिति की अध्यक्ष एवं दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति आशा मेनन ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों से युक्त यह समिति गहन अध्ययन और व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर महिलाओं के हित में समग्र, व्यावहारिक एवं दूरदर्शी अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट