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मंथन

‘माई’ पर मौन

Swatva Desk
Last updated: February 14, 2026 1:56 pm
By Swatva Desk 54 Views
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14 Min Read
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान नरेंद्र मोदी ने लालू यादव के माई समीकरण की काट के लिए अपने ‘माई’ समीकरण को चुनावी मैदान में उतारा था। तुष्टीकरण की राजनीति की जगह संतुष्टीकरण की राजनीति से बिहार का भला होने की आशा जगी है। लेकिन, बिहार में प्रचंड बहुमत की सरकार बनने के बाद सत्तापक्ष व विपक्ष अपने-अपने माई समीकरण पर मौन है।
राजद के नीतिकार यह मानने लगे हैं कि केवल मुसलिम और यादव यानी माई समीकरण के बल पर सत्ता में लौटना अब असंभव हो गया है। इसके कारण राजद और कांग्रेस मुसलिम और यादव के साथ दलित को जोड़कर एक नया राजनीतिक समीकरण गढ़ने में लग गए हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा और जदयू ने महिला व युवा को महत्व देते हुए जो माई समीकरण बनाया था उसके अप्रत्याशित परिणाम हुए। सरकार बनाने के तीन माह बाद भी नीतीश सरकार की ओर से अबतक अपने ‘माई’ यानी महिला और युवा को संतृष्ट करने के लिए उल्लेखनीय कार्य योजना शुरू नहीं की गयी है। चुनाव के पूर्व मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना सरगर्मी के साथ जनता के समक्ष आयी थी लेकिन अब वह ठंडा पड़ गयी है। संतुष्टिकरण के जरिय तुष्टिकरण की राजनीति को विस्थापित करने का अभियान फिलहाल ठहरा सा दिख रहा है।

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Bihar government
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि एक पुरानी कहावत है- लोहा लोहे को काटता है। बिहार की इस जीत ने नया एमवाई फॉर्मूला दिया, जिसका मतलब है- महिला और यूथ। आज एनडीए उन राज्यों में सत्ता में है, जहां युवाओं की संख्या ज्यादा है। बिहार में लालू प्रसाद द्वारा आजमाये गए माई फर्मूले को निश्तेज करने के लिए नरेंद्र मोदी ने जिस ‘माई’ फार्मूले को सामने लाया है उस पर एनडीए की सरकार यदि काम करती है तो यह राजनीति भारत का कायाकल्प कर सकती है। लेकिन, मोदी के इस ‘माई’ समीकरण पर सरकार व विपक्ष दोनो मौन धारण कर बैठे हैं। चुनाव में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को लेकर हायतौबा मचाने वाली विपक्षी पार्टियांे के ऐजेंडे से वह बिल्कुल गायब है। जबकि यह उनका सनातन कर्तव्य है कि लोकहित के मामले का मजबूती से उठायें।
बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व 29 अगस्त 2025 को बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का अनुमोदन किया था। इसके बाद तेज गति से इस पर काम होने लगा था। इस योजना के तहत बिहार के सभी परिवारों में एक महिला को अपनी रूचि के अनुसार रोजगार या उद्योग धंधा शुरू करने के लिए बैंक के माध्यम से प्रथम किस्त के रूप में दस हजार 10,000 की आर्थिक सहायता दी जाने लगी। रोजगार शुरू होने के बाद बैंक से लेनदेन की स्थिति का आंकलन करते हुए आवश्यकतानुसार उन्हें दो लाख तक ऋण दिया जाना है।
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को इस योजना का लाभ मिला। लेकिन, अब इस योजना के लिए नए आवेदन बंद हो चुके हैं और पोर्टल बंद है। एनडीए की नयी सरकार बनने के तीन माह बाद भी इस योजना को आगे बढ़ाने और लक्ष्य तक पहुंचाने के प्रयासों की कोई सूचना नही हैं। ना ही इस योजना की प्रगति की समीक्षा की बात सामने आयी है।
चुनाव के दौरान सरकार के इस योजना का विरोध करते हुए प्रतिपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया था कि यह योजना महिलाओं को पैसा देकर वोट खरीदने जैसा है। यदि इस योजना पर आगे काम नहीं हुआ तो उनका यह आरोप सही साबित होने लगेगा। इसके बाद भारत की 140 करोड़ की आबादी को अभिशाप नही बल्कि वरदान बनाने की बात बेमानी हो जायेगी।
चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अब तुष्टिकरण नहीं संतुष्टिकरण की नीति चलेगी। संतुष्टिकरण के लिए बिहार की बड़ी आबादी के लिए नियमित आय की व्यवस्था करनी होगी। यह घरेलू उद्योग धंधे से ही संभव है। सभी परिवारों के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की घोषणा करने वाले नेता वास्तव में हवा महल बनाने जैसी बात कर रहे हैं।
भारत में हमेशा चुनाव होते रहता है ऐसे में ऐसी महत्वपूर्ण योजना को लागू करने के समय को लेकर हमलावर प्रतिपक्ष के पास वाजिब तर्क का अभाव था। वैधानिक तौर पर सरकार चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद ऐसा नहीं कर सकती थी। इस दृष्टि से बिहार विधानसभा चुनाव के दो माह पूर्व मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की घोषणा एनडीए के लिए राजनीतिक लाभ देने वाला ऐसा कदम था जो वैधानिक रूप से बिल्कुल सही कदम था। जातीय और साम्प्रदायिक गोलबंदी की खुलेआम वकालता करने वाले दल या गठबंधन जब एनडीए सरकार के इस निर्णय को अनैतिक बताने का प्रयास करने लगे तब जनता ने उन्हें सिरे से नकार दिया। विधानसभा चुनाव में एनडीए की प्रचंड जीत में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका थी क्यांेकि परिवार के महिलाओं तक इस योजना का प्रथम किस्त पहुंचने लगा था।

Lalu's Iftar party
बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद बनी एनडीए की सरकार की नैतिक और राजनीतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह इस योजना को व्यावहारिक धरातल पर उतारने के लिए अभियान चलाए। असाधारण संकल्प और इच्छा शक्ति से असंभव सा लगने वाले इस कार्य को संभव बनाया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए धैर्य और सतत श्रम की आवश्यकता है। यदि यह कार्य संभव होता है तो बिहार की यह योजना पूरे भारत के लिए माडल के रूप में सामने आ सकती है।
इसके लिए जिस प्रकार के माहौल व प्रयास की आवश्यकता है, वह फिलहाल नहीं दिख रहा है। इसके लिए रोजगार के लिए इच्छुक महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, नेटवर्क निर्माण एवं बैंकों को संवेदनशील बनाना होगा। सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठनों एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के सहयोग के बिना अकेले सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकती है। यदि यह योजना दो कदम भी आगे नहीं बढ़ती है तो यह नरेंद्र मोदी को लेकर बनी अवधारणा व विश्वास को भी आहत करेगा। मोदी है तो मुमकिन है जैसे नारे का अर्थहीन होने का मतलब जनता का सपना टूटने जैसा होगा।
चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित भाजपा के मुख्यालय पर बीजेपी समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा था कि ये प्रचंड जीत, ये अटूट विश्वास, बिहार के लोगों ने बिल्कुल गर्दा उड़ा दिया है। बिहार के लोगों ने विकसित बिहार के लिए मतदान किया है। बिहार के लोगों ने समृद्ध बिहार के लिए मतदान किया है। मैंने चुनाव प्रचार के दौरान, बिहार की जनता से रिकार्ड वोटिंग का आग्रह किया था और बिहार के लोगों ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए। मैंने बिहार के लोगों से एनडीए को प्रचंड विजय दिलाने का आग्रह किया था, बिहार की जनता ने मेरा ये आग्रह भी माना।
बिहार के लोगांे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात मान ली तो अब नरेंद्र्र मोदी की बारी है कि वे लोगों की आकांक्षा को पूर्ण करने का प्रयास करें। इस बात को मजबूती से कहने की जिम्मेदारी प्रतिपक्ष की है। लेकिन, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर ठंडा है।
बिहार ने 2010 के बाद का सबसे बड़ा जनादेश एनडीए को दिया है। निश्चित तौर पर यह जनादेश बिहार के लोगों ने अपनी तकदीर सुधारने के लिए दिया है। बिहार के माथे से रोजगार के लिए पलायन का टीका मिटाने के लिए दिया है।
प्रचंड बहुमत मिलने के बाद मोदी ने कहा था कि बिहार के चुनाव ने एक और बात सिद्ध की है। अब देश का मतदाता, खासतौर पर हमारा युवा मतदाता, ‘मतदाता सूची के शुद्धिकरण को बहुत गंभीरता से लेता है। बिहार के युवा ने भी मतदाता सूची के शुद्धिकरण को जबरदस्त तरीके से सपोर्ट किया है। अब हर दल का दायित्व बनता है कि वे पोलिंग बूथ पर अपनी-अपनी पार्टियों को सक्रिय करें और मतदाता सूची के शुद्धिकरण के काम में उत्साह के साथ जुड़ें और शत प्रतिशत योगदान दें, ताकि बाकी जगहों पर भी मतदाता सूची का पूरी तरह शुद्धिकरण हो सके।

Bihar
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि बिहार विधानसभा चुनावों में मिली जीत विकास की राजनीति के लिए एक जनादेश है। बिहार के लोगों ने भाई-भतीजावाद की राजनीति का बहिष्कार किया है। यह बिहार की उन महिलाओं की जीत है जिन्हें राजद के जंगलराज का प्रकोप झेलना पड़ा। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताया जिससे देश की चुनावी प्रक्रिया में विश्वास और मजबूत हुआ है। प्रधानमंत्री ने अपने उस भाषण में कहा था कि बिहार में शायद ही कोई चुनाव बिना पुनर्मतदान के होता था, लेकिन इस बार मतदान शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।
यह सभी मानते हैं कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने के बाद बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति ठीक हुई है। सड़कें ठीक हुई हैं। बिजली की भी उपलब्धता संतोषजनक है। लेकिन, रोजगार के अवसर के मामले में बिहार अब भी अन्य प्रदेशों से पीछे है।
उस भाषण में मोदी ने कहा था कि मतदाताओं ने मतदाता सूची के शुद्धिकरण को भारी समर्थन दिया है और अब सभी दलों का यह कर्तव्य है कि वे मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें। उन्होंने महागठबंधन पर तुष्टिकरण और विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा था कि कांग्रेस में एक अलग गुट उभर रहा है जो इस नकारात्मक राजनीति से असहज है। एनडीए की जीत में समाज के हर वर्ग का योगदान रहा है, जिनमें महिलाएँ और युवा सबसे आगे हैं।
अपने उस वक्तव्य के माध्यम से राजनीति को रचनातमक संस्कार देने का उनका यह प्रयास तभी संभव होगा जब आम आदमी की मूलभूत जरूरतें पूरी होंगी। रोजी-रोटी के बिना कोई उनका स्थायी समर्थक नहीं बन सकता है।

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Rabri Devi
नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थिति भाजपा के मुख्यालय में आयोजित उस सभा में कहा था कि बिहार की जीत ने केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार किया है। जिस प्रकार गंगा बिहार से बंगाल की ओर बहती है, उसी प्रकार बिहार ने भी बंगाल में भाजपा की जीत का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के लोगों को आश्वासन दिया कि भाजपा उनके साथ मिलकर राज्य से जंगल राज को उखाड़ फेंकेगी।
श्री मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी, राष्ट्रीय समता पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान की सराहना करते हुए चुनावी सभाओं में किए गए वादों की याद दिलायी थी। इसका मतलब यह है कि नरेंद्र मोदी को इस प्रचंड बहुमत को लेकर अपने दायित्व का बोध है। उन्हें यह भी मालूम है कि यह बहुमत केवल नीतीश कुमार के चहरे पर नहीं मिला है बल्कि मोदी को लेकर कायम विश्वास को भी मिला है। नीतीश कुमार भी सार्वजनिक रूप से यह कहते हैं कि नरेंद्र मोदी के कारण ही बिहार का सब काम हो रहा है ओर आगे भी होता रहेगा। लेकिन, इसके लिए बिहार में जिस प्रकार के प्रयास की आवश्यकता है वह अब तक नहीं दिख रहा।

TAGGED: नरेंद्र मोदी, माई, मुसलिम, यादव, लालू यादव
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