पटना : राजधानी पटना स्थित जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश कार्यालय में रविवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थक और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के गुट आपस में भिड़ गए। मौका तो नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की पार्टी में ‘ग्रैंड एंट्री’ का था, लेकिन देखते ही देखते यह कार्यक्रम हंगामे, गाली-गलौज और मारपीट की भेंट चढ़ गया।
जानकारी के अनुसार, हंगामे की मुख्य वजह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सीएम की कुर्सी छोड़ने और राज्यसभा जाने का हालिया ऐलान है। पार्टी अब स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बँटी नजर आ रही है। पहला गुट जो इसे नीतीश कुमार का निजी और स्वागत योग्य फैसला मान रहा है। वहीँ, दूसरा गुट नाराज कार्यकर्ता कार्यकर्ताओं का है जो इसे एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दे रहा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नीतीश कुमार को जबरन कुर्सी छोड़ने पर मजबूर किया गया है।
वहीँ, निशांत कुमार की जॉइनिंग के वक्त जैसे ही ललन सिंह अपने भारी समर्थकों के साथ कार्यालय पहुँचे, वहां पहले से मौजूद नाराज कार्यकर्ताओं का सब्र टूट गया। कार्यकर्ताओं ने सीधा आरोप लगाया कि ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने मिलकर नीतीश कुमार के खिलाफ साजिश रची है और पार्टी को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर दिया है। देखते ही देखते दोनों ओर से तीखी नोकझोंक शुरू हुई, जो गाली-गलौज और फिर हिंसक झड़प में बदल गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को बीच-बचाव करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
इस पूरी घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि कैसे पार्टी के ही लोग एक-दूसरे से उलझ रहे हैं। एक तरफ ‘ललन सिंह जिंदाबाद’ के नारे लग रहे थे, तो दूसरी तरफ उन्हें ‘पार्टी का गद्दार’ बताकर नारेबाजी की जा रही थी। नाराज समर्थकों का साफ कहना है कि नीतीश कुमार अपनी मर्जी से पद नहीं छोड़ रहे, बल्कि उन पर दबाव बनाया गया है। निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री के दिन हुई इस हिंसक झड़प ने जेडीयू के भीतर मचे आंतरिक घमासान को सड़क पर ला दिया है। मुख्यमंत्री के बेटे के स्वागत समारोह में हुई यह मारपीट पार्टी की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।